रचनाकार - सुन्दर कबडोला
“कुँमाऊणि पाँठ-शाला”
दोस्तो कुँमाऊ मे ऐसे प्रचलित शब्द जिनके दो या दो से अधिक अर्थ निकलते है “कुँमाऊणि पाँठ-शाला” के माध्यम से आपके सम्मुख उदाहरण समेत प्रस्तुत करना ही “कुँमाऊणि पाँठ-शाला” टोपिक (Topic) का लक्ष्य है तो लिजिये-
कुँमाऊणि शब्दावलि से “चाँआ” का अर्थ
उदाहरण-
जँजमान:- बाँमड ज्युँ, बाँमड ज्युँ भैर आओ दे
बाँमड:- कै भौ (क्या हुआ)
जँजमान:- बाँमड ज्युँ तुमतै कुछिया लाँख टकै त्यर कुण्डलि छू कुण्डलि मा युँ मुर्खल सैणि छा
बाँमड:- अरे ब्वारिल कै कर दे इतार
जँजमान:- बाँमड ज्युँ राति परै सैणि तै कौ कि “चाँआ दै” (चाय देना)
बाँमड:- अच्छा फिर “कै भौ” (क्या हुआ)
जँजमान:- दी घण्ट तलक उ “नि फरक” (नही आई), “चाँआ लिबै” (चाय लेकर)
मिल कौ कै बात हगै मि उगु “भैर चाँआ ले गौय” (बाहार देखने चला गया)
बाँमड:- अच्छा पै फिर कै भौ जँजमान
जँजमान:- बाँमड ज्युँ उ आँगण मा ठाँड हबै पत ना कै चाण चिताण (खोजने मे) मा लारैछि
बाँमड:- अच्छा पै फिर त्वील “कै कौय” (क्या कहा)
जँजमान:- मिल वहै कौय म्यर “चाँआ” का छू ता उ मैथे बोलि, अब कगै “चाँआ” कुणछा,
दी घण्ट बदि आपण मुनैई फोड रे,
कै हरै रो, कौ उण वाल छू तुमर जो “चाँआ” “चाँआ” “चाँआ” कुणछा
बाँमड:- आओ दगडियो यु कुँमाऊ मा “चाँआ” कदुक मतलब हुणि
अर्थ-
1- चाँआ दै को उणो (देखना कौन आ रहा है)
2- चाँआ दै म्यर डबल झँड गिण आगँण मा (ढुँडना मेरे पैसे आगँण मे गिर गये है)
3- चाँआ पका दै (चाय बनाना)
लेख - सुन्दर कबडोला ©copy right, All Rights Reserved
गलेई - बागेश्वर- उत्तँराखण्ड
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