
कलबिष्ट - कुमाऊँ के लोक देवता
लेखक - भुवन चन्द्र पांडे
यै जीवनक बार बृतान्त भौत रोचक और लम्ब छू, उकैं यां उधृत करंण म्यार लिजी कठिन छू, यदुक पर्यापत हौल कि तीन साड़ेतीन सौ साल पैली कोट्यूड़ी कोट में केशव कोट्यूड़ी एक राजपूतौक यां एक च्यल पैद भौ जैक नाम कालू या कलुवा छी। ऊ अत्यन्त वीर और भौत रंगील नौजवान छी। ऊके बंण में घूमंण, वंशी बजूंण, घंण जंगल और गाड़ गध्यारन गौर भैंस चरूंण में भौत आनन्द ऊंछी। ऊ ज्यादेतर आंपुण गौर भैंसनकैं बिनसराक जंगल मे चरूहुं लिजांछी और दिन भर वांशुरी बजूंछी। यौ मानी जां कि वीक वांशुरी मधुर आवाज और भैंसनौक औड़ाणैंकिआवाज गोर भैंस चरूनी कैं आजि लै बिंसराक जंगल में सुंणाई पणूं।
यैक पैल मन्दिर अल्माड़ बटि २२ किलोमीटर कपड़खान में अल्मोड़ा-ताकुला मोटर मार्ग में छू। उपनाक पशुपालक जंगली पशुवों बटि आपंण पशुओंकि रक्षा लिजी कलबिष्टौक आह्वान करनी। बिनसर इथकै उज्यांणि ढाल मे लै यैक एक मन्दिर बताई जां। गोल्ल समान लोग न्यायाक लिजी यैक पुकार लै करनी, घात डालनी, यौ अन्याई कैं दण्ड दिबेर न्याय करूं यौ मान्यता छु । यै कै लिजी यै कैं " डाना गोल्ल " लै कूनी । आपंण क्षेत्र में सब वर्णाक लोगों द्वार यैक पूज करी जां। यौ पाली पंछाऊ (फल्दाकोट) मेंआजि लै प्रचलित छू। यां " धौंसी "( जागर) रूप मे यैक पूजाक विशेष आयोजन करी जां।
एक जनश्रुति अनुसार यैक असली नाम कालू कोट्यूड़ी छी।
यौ पाटिया गौं पास कोट्यूड़ कोटोक केशव कोट्यूड़ीक च्यल छी ।

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