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पहाड़ घुमि यायू


पहाड़ घुमि यायू 
(रचनाकार: रमेश हितैषी)
पलायन से दुर्दशा बखान करती  एक कुमाउँनी कविता

बिहि पोरहुँ आपण पहाड़ घुमि आयू,
नलू में उमई पाणी पि हायू.
टूटि कुड़ी बांजी पाटई,
बुकिलु जामी गुठ्यार देखि यायू.

को पूछूं छि एक गिलास पाणि,
माठु माठु पनह्यर लै जै हायू.
धरुक जगम सिमेंटकि टंकि रौलु हन बाथरूम,
आपण गौंक विकास देखि यायू.

मलि सोचि एक झपाक  डन पन जै  हुल,
कांफोउ हिसाउ और किल्म्वाड़  खै हुल.
पर वेति डुट्याउक छप्पर भौत सालुक बाद लिसक कंटर,
फुकि जंगवक में धुवां रोव और झोलै झोल देखि यायू.

खबर बात पुछ्णक बौहनल,
व्याउ तलि बाखइ जबरदस्ती जै आयू.
चुलु फुकनि काकि पाणी सारनु कुकड़ हई कक,
इकल बूढ़ी बाड्युक बुर हाल देखि यायू.

बजार में नेताउक क्वर भाषण,
दिन दोफरि सराबियुक जमघट देखि यायू.
गाड़ियूकि लम्बी लैन मतलबी अपण पर्या,
हमरै हमुकैं कस लुटनी बस अणकसै प्यार देखि यायू.

व्यो बर्यातु में अलूणि सान,
विडिओ वाउक पावर लै  देखि यायू.
खाण पीणु लत्त कप्पड़ अफी जस,
बस अधराति भुतुक जै नाच देखि यायू.

बेरोजगारुक थुपुड़ पधान बनणकि जुगुत,
नै पुराणी सरकारकि करतूत देखि यायू.
जै रौल पाणिकू एक छिटु नि हौय,
वेति करोड़ो लागतकि बनी नहर देखि यायू.

अपण गौं में आरक्षण में बनि प्रधान पतिक तन तन,
उ पधानिकु अघिनकु भविष्य देखि यायू.
पांच लाखकि रिकवरी चार सलाकि सजा,
हाई कोर्टकू वारंट देखि यायू.

ए.पी.एल. बी.पी.एल. अंतोदय,
उज्ज्वला गैसकि कहानी सुणि यायू.
गल्ल दारुकि मौज मस्ती,
गरीब गुरुबुकि लाचारी देखि यायू.

पशु पालन, स्वस्थ्य केंद्र, डाक बंग्यळ,
और जग जगु ठुल ठुल रेजॉर्ट देखि यायू.
बिहि तक जो थोकदार छि वे बाखइक,
उनुकेँ रेजॉर्ट में चौकीदार देखि यायू.

कुड़ी कुड़ी रोवा रो गों गों में भूतेव,
भ्योउ  हन घूरि गाड़ि देखि यायू।
अपणि अपणि कूर्शी बचणक चक्कर में,
एक दुसरक टांग खैंचन देखि यायू।

कफनक लिजि मिटौण,
मुर्द लिजणक लिजि बोतल मंगान देखि यायू।
झुट मूट थ्वड़ दिनी सुभ चिंतक,
थूक लगै ढ़ेडुवकै वाई बेमतलब रुणि देखि यायू।

सर्वाधिकार@सुरक्षित

श्री रमेश हितैषी
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