'

पिनाकेश्वर महादेव, शिव मंदिर

पिनाकेश्वर महादेव, शिव मंदिर, पिनाथ, बागेश्वर, कुमाऊँ,  famous Pinakeshwar Mahadev, Shiva temple, Pinath, Bageshwar, Kumaun, Uttarakhand

पिनाकेश्वर महादेव, शिव मंदिर

(पिनाथ, बागेश्वर)
(पिनाकेश्वर मंदिर कौसानी से करीब आठ किमी की दूूरी पर स्थित कुमाऊँ का प्रसिद्ध शिव मंदिर है।
Pinakeshwar Mahadev, is a famous Shiva temple situated near Kausani town of Bageshwar District in Kumaun region of Uttarakhand)

पिनाकेश्वर महादेव मंदिर विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल कौसानी से करीब आठ किमी की दूूरी पर पिनाथ पर्वत पर स्थित कुमाऊँ का प्रसिद्ध शिव मंदिर है।  इस मंदिर से क्षेत्र की कत्यूर, बौरारो और गेवाड़ घाटी के लगभग २०० से अधिक गाँवों के लोगों की अगाध श्रद्धा व गहरी आस्था रही है।  मंदिर की खोज कुमाऊं के चंद राजवंश के महाराजाधिराज बाल बहादुर ने वर्ष 1454 में की थी जब वह इस स्थान पर आखेट के लिए आये थे।  उन्होंने ही इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया और भक्तो के आने जाने की सुविधा के लिए सीढियो का निर्माण करवाया।  राजा को महादेव ने प्रसन्न होकर पुत्र का वरदान दिया जिसका नाम उन्होंने उदेचंद रखा। 

के बारे में यह भी कथा प्रचलित है कि यही एक ऐसा मंदिर है जिसकी मूर्तियों को रोहिल्ला आक्रमणकारी नष्ट नहीं कर पाए थे।  कहा जाता है की इस मंदिर की मूर्तियों की खंडित करने हेतु जब रोहिल्ला सेना घुघुतिया मन्दिर के पास पहुंची तो वह से घुगुती ने उड़कर भगवान शिव की इस बात की सुचना दे दी।  इस सुचना पर भगवान भोलेशंकर अति क्रोधित हुए और उन्होंने पहाड़ी के जंगल में लोहे के ओले (गोले) बसाने शुरू कर दिये। इन ओलों की मार से रोहिल्ला सैनिकों के छक्के छूट गए और वह एक-एक कर मौत के मुँह जाने लगे और सारी सेना वही मारी गयी।  स्थानीय लोगों का कहना  है कि अभी भी वहां कभी कभी लोहे के छोटे छोटे गोले दिखाई दे जाते हैं।  वैसे सच्चाई यह हो सकती है कि इस ऊंचाई पर उन सैनिको का चढ़ना उस समय के साधनो में मुश्किल रहा होगा और मौसम के ख़राब होने पर ओलों की मार से वह सब वहीं मारे गए होंगे।

पिनाकेश्वर महादेव, शिव मंदिर, पिनाथ, बागेश्वर, कुमाऊँ,  famous Pinakeshwar Mahadev, Shiva temple, Pinath, Bageshwar, Kumaun, Uttarakhand

समुद्र सतह से 2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पिनाकेश्वर मंदिर बागेश्वर और अल्मोड़ा जिले की सीमा में पड़ता है। ऊंची चोटी में बना मंदिर अत्यंत रमणीक है। धर्मशिला से मंदिर तक 365 पौराणिक सीढ़ियां बनी हैं।यह मंदिर यहां पर खोदे गए तीन कुओं के लिए भी जाना जाता है क्योंकि यह हमेशा जल से भरे हुए रहते हैं  समुद्र ताल से लगभग ८००० फिट की ऊंचाई पर जल से भरे कुओं का होना हर किसी को अचंभित करता है इन्हीं कुओं से मंदिर के उपयोग के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है।

मंदिर में नियमित पूजा पाठ, कथा भागवत पुराणों का वाचन होते रहते हैं। मंदिर में कार्तिक महीने की चतुर्दशी और पूर्णिमा पर दो दिन क्षेत्र का सुप्रसिद्ध मेला लगता है। मेले में आस पास के गाँवों के अलावा दूर-दूर से मेलार्थी पहुँचते हैं।  बताया जाता है कि पिनाकेश्वर मंदिर में लगने वाले मेले की परंपरा सदियों पुरानी है।  बलेगांव के लोगों द्वारा भगवान भोलेनाथ की आरती व भोग लगाना इस मेले का मुख्य आकर्षण होता है । चतुदर्शी की रात को बोरा रौ घाटी के बलेगांव से लोग ढोल नगाड़ों के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं।  रात के समय वह भगवान शिव की विशेष आरती कर उन्हें भोग अर्पित करते हैं।  इस दौरान संतान प्राप्ति की कामना लेकर आए महिला व पुरुष श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं।  लोगों का विश्वास है कि जो भी व्यक्ति मंदिर में सच्चे मन से पहुंचता है। भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामनाओं को पूरी कर देते हैं।

पिनाकेश्वर महादेव, शिव मंदिर, पिनाथ, बागेश्वर, कुमाऊँ,  famous Pinakeshwar Mahadev, Shiva temple, Pinath, Bageshwar, Kumaun, Uttarakhand

मान्यता है कि महादेव प्रसन्न होकर उन्हें संतान सुख देतेेेे हैं। मनौती पूरी होने पर लोग मंदिर में घंटे, घड़ियाल, चांदी के छत्र अर्पित करने के अलावा लोग भंडारे का भी आयोजन करते हैं। मंदिर में पूजा पाठ की जिम्मेदारी कांटली के कांडपाल परिवारों के पास है जबकि कांटली मठ के श्री महंत नरेंद्र गिरि महाराज की देखरेख में मंदिर की व्यवस्था चलती हैं।

यहां से सूर्य के उदय और अस्त होने का मनोरम दृश्य दिखाई देता है जबकि हिमालय की लंबी श्रृंखला के अलावा सोमेश्वर और गेवाड़घाटी दृष्टिगोचर होती है। इस मंदिर में बागेेश्वर और अल्मोड़ा जिले के कई गांवों के लोग पूजा के लिए आते हैं।  निसंतान महिलाएं कार्तिक महीने के चतुर्दशी की रात अखंड दीपक जलाती हैं।  मेला समापन के साथ ही इसी दिन से मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ