
--:हमार भिंज्यू (जीजाजी या फूफाजी):--
म्यार दिदिक दुल्हौ हमर बाबुक जवैं और बड़बाज्यूक जवैं हमार भिन्ज्यू भाय। जब उनेर भाय तो सब इंतजाम चकाचक। धोई-धाई(धुले हुए)आंगण,पटखाट में दरि ,दन(छोटा कालीन) सब हुनेर भै। काठैक कुर्सी एक स्टूल लै पोंछ पाछि बेर भ्यार भै हुनेर भै। हम नानतिन फिटफाट झट्ट खुटनहाथ लगै बेर नमस्कार हुं तंग्यार रुनेरभयां। मनै मन हम खाण में ध्यान लगूनेर भयां आज तो भल भलै पाकौल(अच्छा अच्छा पकेगा)।
हमरि इज,जेड़ज, काखि रिश्याउन पन क्याप क्याप पकूंणमे दिनमान भर जे करन्हाल हो? पुर दिन भिंज्यू जतु खान्हांल हो पर बची खुची हमन जांलै लै पुजि जानेर भौय हो। पड़ौसौक भुबन कुणौय" त्यार ठाठ छन रम्मुआ आज तौ ,त्यार भिंज्यू ऐरान ।(आये हैं)
मकं के देलै, आज मकं त्वील के नि दियौ तौ जब म्यार भिंज्यू आला तो मैंलै तुकों घुत्ती द्यूंल देखिए। मैल तुकों लैमनचूस देछी। छि हाड़ि , कांबटि द्यूं तुकों मकं आय जांले के नि मिल मैलै चयीचय्यै छूं, भगवान कसम ,सांच्चि कुणंयू। म्यार दिद जैके ऐरै ,भिंज्यू कंजूस छनहो। हम सब उनन थै डरनूहो। पुलिस वाल छन,मोछ (मूंछें) देखीं त्वील(तूने) उनार। कम बलानी और आंख ताण बेर चांनी बबाहो मेरि, मैंतोनमस्कार कै
बेर उनै रेयूं ।
आमाक हाथ में झोल जौ देखौमैल दिदिल भेजन्हौंल। हमर यां बटिक तो पुर पिटार भर बेर मालटाल (मालमत्ता) लिजाल। दिद लै ऊंन धैं।(आती तो) दिनमान भर खानै रुंनी भिंज्यू रात हूं खर्राट ल्हिबेर पड़ि जाल। एक बात तो भई इन दिनन खाणैक बहार,भ्यार बटिक लै मिठ्ठै बड़बाज्यू लैईं। तनार हाथ धोऊंण हुं लै कान में तौल्लि(तौलिया)ल्हिबेर बाबू ठाड़ है रुनी।
वाह भिंज्यू तुम लै अजब गजब छा हो।
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