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मैं च्येली तुमर धेइ की


मैं च्येली तुमर धेइ की
रचनाकारश्याम जोशी

कदुक खुशी तुम हया।
च्यल हई में बांटी आपण।।
बाखई में मिठे,

म्यर हुंड़म गुड़क भेलि तोड़ी।
किले करे तुमल म्यर बांट।।
आपणे घरम,

देखो की देव भूमि छ हमरी।
33 करोड़ देवताओं ले वास वा छन।
मैले भगवती तुमरि घरकी

कामक टेम पर याद ऐ जे म्यरी
भल अल खाण टेम जय भूली
मैं च्येली तुमर धेइ की,

सौ चौटम बाटिक लाकड़ म्य्ल तोड़। 
भिमुक डोवा बाटिक भिमु म्य्ल काट।
जिन्दगिकी नि कर परवा,

पूसक महैन ठंड म्यल नि देख।
जेठक घाम कास हुने मके न्हे पत।।
रत्ती बाटिक व्याव तक रुछि खेतम,

सारी उमर मेल सोच।
आपण ईज वौज्युक लिजी।।
मैं च्येली तुमर धेइ की,

श्याम जोशी अल्मोड़ा (चंडीगढ़)
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
मोबाइल: +91-9876417798

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