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जिंगल बेल (कुंमायूंनी)


जिंगल बेल
(रचनाकार: उमेश चंद्र त्रिपाठी "काका गुमनाम")
सुप्रभात हो दगड़ियो।
जिंगल बेल सारि दुनी में दगड़ मिलबेर गाई जांड़वाल अमरीकी गीत छू जो कि आज लै भौत्ते प्रचलित तुकांतक गीत छू। यैक रचियता जेम्स लार्ड पियर पौंट ( १८२२-१८९३ )छी । य गीतक प्रकाशन, सब्बूं हबेर पैल्ली वर्ष १८५७ में "one horse open sleigh" नाम बटि करि छी।  य गीतक प्रयोग क्रिसमस त्योहारैकि खुशी मनूंणां लिजी करीं जां।  मैल य कविताक अनुवाद कुंमायूंनी भाषा में करणक प्रयास कर राखो।

बर्फल आच्छादित कुड़ि खेत, और छू भैर बाड़ि।
म्यर पास छू एक घोड़ वालि, खुल्ली छकि गाड़ि।
खेतनाक खलिहानाक बगल बटि, हम जांणयूं।
रास्त भर हम सब हंसणयूं ,और गीत लै गांणयूं।

घोड़े कि पुछड़ि में लागि, घंटी बाजिड़यीं टन टन।
उनरि आवाज सुंणबेर उत्साहित हुणों हमौर मन।
सवारी भौत्ते शानदार छू, अनोखी छू यैक बात।
वाह कदू बढ़िय गीत छू, कदुक बढ़ी छू य रात।

घंटिनि कि टन टन, घंटनी कि टन टन यदु न्यारी।
भौत्ते बढ़ि य गाड़िछू, और बढ़िछू यैकि सवारी।

हे जिंगल बेल जिंगल बेल, जिंगलक छू य तेज।
घोड़ गाड़िक हमूल आनंद लि हालौ, नाम छू जैक स्लेज।

हे जींगल बेल जिंगल बेल,
जिंगल आल दवे।

आप सब्बूंकू मेर्री क्रिसमस

जै जै हमार पहाड़! जै जै उत्तरांचल!
उमेश त्रिपाठी (काका गुमनाम) द्वारा कुंमायूंनी में अनुवादित।
उमेश चंद्र त्रिपाठी "काका गुमनाम" २५-१२-१७
श्री उमेश चंद्र त्रिपाठी "काका गुमनाम" जी की फेसबुक ग्रुप कुमाऊँनी शब्द सम्पदा पोस्ट से साभार

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