चेला ये बलदौ ध्यान राखे
यो बलद आब बूढ़ी गौछ
लठ्ठि ले बिल्कुले जिन हानये
गडा जुताई करि पटा रौछ।
छयो तमतमानो, उच्चा खुट्टा
मोटा बेर हेई रुंछ्यो लाल
छयो उचों जुडो, ठाडा सिंगा
मुम्बईया हीरो जैसी चाल।
नाना छिना बठि खेती को
यो बलद हमारौ आधार छ
चेला कि न्योति कमाई में
बरा बरी को हिस्सेदार छ।
बुढया काल जिन छोडये
छयो बलद जवानी में अधार
सेवा पाणी करि अब
"राजू" भयो चुकुनों अभार।

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शब्दार्थ:
शब्दार्थ:
बलदौ - बैल का।
हानये - मरना गडा - खेत।
जुडो - गर्दन।
पटा - थका
नाना छिना - बच्पन।
चुकुनों - प्रकट करना

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बगोटी (चंपावत - उत्तराखंड)
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