कदुक रंगील म्यर पहाड़
श्याम जोशी, अल्मोड़ा (चंडीगढ़), 12-05-2015
( सर्वाधिकार सुरक्षित )
रचनाकार: श्याम जोशी
कदुक भल कदुक रंगील म्यर पहाड़।
डान कान गौं गाड़ छ या बड़ महान।।
ताजी हाव यांकि ठंड ठंड पाणी।
जाग जाग कें पाणिक नौऊ यति।।
जेठक मैहिणं काफुव’कि बहार।
दागड़ में हिसावुक मिठ मिठ मिठास।।
ह्यूनम घाम भै बैर निमुक भल स्वाद लागूं।
ब्याउ’के भांग खिति गडरिक साग स्वाद न्यार हुँछू।।
हिटो रे दादाओं हिटो रे भुलियो न्है जानु पहाड़।
वें छें हमर गौं गाड़ उतकी छी हमरि पहचाण।।
श्याम जोशी, अल्मोड़ा (चंडीगढ़), 12-05-2015
( सर्वाधिकार सुरक्षित )


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