तरुड़, तौड़ या तैड़ू (Dioscorea deltoidea)
तल्ड (तरूड़) जिसे उत्तराखंड के कुमाऊँ में तौड़ या 'तरूड़' और गढ़वाल में "तैड़ू" या "तेडू" के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड में महाशिवरात्री के व्रत के दिन शाकाहारी आहार के रूप में और प्रसाद के तौर पर इसे विशेष रूप से ग्रहण किया जाता है। तरूड़ (तल्ड) एक तरह का कंद मूल आहार है जिसकी सब्जी बनाई जाती है और यह पहाड़ो में ज्यादा उगता पाया जाता है। तरूड़, तौड़ या तैड़ू (वानस्पतिक नाम Dioscorea deltoidea) एक बारहमासी बेल वाला पौधा है। इसका जड़रुपी तना एक बड़े भूमिगत कंद के रूप जमीन के अंदर मोटाई और लम्बाई में लगातार बढ़ता रहता है, जो विभिन्न आकार लिए हुए हो सकता हैं। साथ इसकी बेल भी जमीन के ऊपर फैलती रहती है और आस पास की वनस्पति को आच्छादित कर लेती है। इसकी बेल पर फल भी लगते है जो मुख्यत: इसके बीज के रूप में प्रयोग किये जाते हैं।
तरूड़ का पौधा बेल के रूप में हिमालयी क्षेत्रो में कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिमी चीन तक विभिन्न स्थानों में समुद्र तल से ५०० से ३००० मीटर तक की ऊंचाई वाले स्थानों में बंजर जमीन पर या जंगलों में जंगली बेल के रूप में उगता पाया जाता है। पहाड़ों में कहीं-कहीं घरों में भी लोग इसे पहाड़ी खेतों के मेंड़ के ढलान पर या बड़े घड़े के अंदर भी उगाते हैं। कुमाऊँ में घर पर उगाये गए तरूड़ को घर तरूड़ और जंगल से प्राप्त तरूड़ के बण तरूड़ कहते हैं। पर्यावरण विज्ञानी डॉ राजेंद्र डोभाल जी के अनुसार इसकी व्यवसायिक क्षमता देखते हुए भारत के कुछ मैदानी राज्यों जैसे पंजाब, महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश में इसकी व्यवसायिक खेती की जाती है।
तरुड़ को हमारे देश में विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे तल्ड, तरूल, तैड़ आदि, अंग्रेजी में इसे हिमालयन वाइल्ड यम (Himalayan wild Yam) या नेपाल यम (Nepal Yam) के नाम से जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम डाइसकोरिया डेल्टोइडिया (Dioscorea deltoidea) है तथा विश्वभर में डाइसकोरिया जीनस के अन्तर्गत इसकी लगभग 600 प्रजातियां बताई जाती हैं जो डाइसकोरेइसी परिवार से सम्बंध रखती है। विकिपीडिया में डाइसकोरेइसी परिवार (Dioscorea genus) की 613 प्रजातियों (species) का उल्लेख किया गया है।
तरूड़ की व्यवस्थित पत्तियाँ सरल होती हैं, लम्बाई 5-11.5 सेमी, चौड़ाई 4-10.5 सेमी, अंडाकार या त्रिकोणीय-अंडाकार, अक्सर दिल के आकार के, बेसल लोब गोल या कभी-कभी बाहर की ओर पतला, 7-9-नुकीले, लंबे-नुकीले, ऊपर के बालों वाले, नीचे नसों पर मख़मली होती हैं। पत्ती-डंठल 5-10 सेमी लंबे, पतले होते हैं।
तरूड़ में फूल मई-जुलाई के दौरान आते हैं, नर फूल स्पाइक्स पत्ती के कुल्हाड़ियों में एकान्त, सरल या कभी-कभी शाखाओं वाले, पतले, रेचक, 7.5-25 सेमी लंबे होते हैं। फूल छोटे दूर के समूहों में होते हैं; पुंकेसर 6, एथेरिफेरस। महिला स्पाइक्स एकान्त, पतला, 15 सेमी तक लंबा, कुछ-फूलदार होता है। कैप्सूल 2 सेमी लंबा, 3 सेमी चौड़ा, मोटा या मोटा होता है। बीजों को असमान रूप से चौतरफा पंख लगाया जाता है।
वनस्पति शास्त्रियों के अनुसार तरूड़ सामान्यतः Tropical क्षेत्र का पौधा है परन्तु इसकी कुछ प्रजातियों का विस्तार Temprate क्षेत्रों तक पाया गया है। तरूड़ की कुछ जंगली प्रजातियां Steroidal saponins के मौजूद होने के कारण मानव स्वास्थ्य के लिए जहरीली होती हैं। लेकिन इनको भी Detoxify करके खाने योग्य बनाया जा सकता है। प्राचीन काल से ही खाद्य तरूड़ तथा जहरीले तरूड़ की प्रजातियों की पहचान उसकी पत्तियों से की जाती है क्योंकि खाद्य प्रजाति की पत्तियां एक दुसरे के विपरीत पाई जाती हैं तथा जहरीले प्रजाति में प्रत्यावर्ती (alternate) पत्तियां पायी जाती है।
बताया जाता है की कुछ देशों में इसका उपयोग स्थानीय रूप से दवा, हेयर वॉश के रूप में भी किया जाता है। सामान्य चिकित्सकीय उपयोग में तरुड़ की कंद के रस का प्रयोग राउंडवॉर्म के उपचार में किया जाता है जिसके लिए शाम को इसकी जड़-कंद का रस निकाला जाता है। इसके अलावा इस रास का उपयोग कब्ज को कम करने के लिए भी किया जाता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में तो तरूड़ की जहरीली प्रजातियों में मौजूद Steroidal saponins को भी कई रासायनिक क्रियाओं से गुजारने के बाद Steroida hormones तथा गर्भ निरोधक के लिए प्रयोग किया जाता है।
तरुड़ की Dioscorea deltoidea प्रजाति Dioscoreacea से संबंधित है, यह राइजोम या बल्बिल का उत्पादन करती है जो सैपोजिन स्टेरॉइडल यौगिकों में समृद्ध है। इन यौगिकों का औषधीय, औद्योगिक और वाणिज्यिक रूप से अत्यधिक महत्व है। डी डेल्टोइडिया expectorant और शामक है। यह कार्डियोवस्कुलर सिस्टम, सेंट्रल नर्वस सिस्टम, फीमेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम में शिथिलतापूर्ण बदलाव, हड्डियों की बीमारी और जॉइंट मेटाबॉलिक डिसऑर्डर, त्वचा रोग, ऑन्कोलॉजी और इम्यूनो-डिफीसिअन्सी और ऑटोइम्यून बीमारियों के उपचार में प्रयोग होता है। डी डेल्टोइड का व्यावसायिक रूप से अपने बायोएक्टिव रासायनिक पदार्थों जैसे डायोसजेनिन, कॉर्टिकोस्टेरोन और सिगमास्टरोल (Stigmasterol) के लिए उपयोग किया जाता है।
चिकित्सकीय उपयोग में तरूड़ मुख्य रूप से सक्रिय यौगिक डायोसजेनिन के स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण वनस्पति माना जाता है। जिसके लिए इसे आमतौर पर जंगलों से प्राप्त किया जाता है और कहीं-कहीं जैसे वियतनाम और रूस जैसे देशों में इसकी खेती भी की जाती है। इसकी अधिकांश प्रजातियों की जड़-कंद में विभिन्न चिकित्सकीय उपयोग वाला "डायोसजेनिन" नामक रसायन पाया जाता है। इसकी विभिन्न प्रजाति की जड़ों में औसतन 4.8% डायोसजेनिन होता है। डायोसजेनिन जो एक स्टेरॉइडल एग्लिकोन है, कई हार्मोन के रासायनिक संश्लेषण का प्रमुख यौगिक रसायन है। Diosgenin से व्यवसायिक रूप Stigmasterol, Sapogenins, Cortisone, pregnenolone, Progesterone, बीटा- Sitosterol, Ergosterol बनाये जाते है जो Progestorone को Synthesis करने में सहायक होते है तथा शरीर में विटामिन D3 को Synthesis करने में भी सहायक होते है।
प्रोजेस्टेरोन (Progestorone) और अन्य स्टेरॉयड दवाओं के निर्माण के लिए आधुनिक चिकित्सा में डायोसजेनिन का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। ये गर्भ निरोधकों के रूप में और जननांग अंगों के विभिन्न विकारों के उपचार के साथ-साथ अस्थमा और गठिया जैसे अन्य रोगों के उपचार में उपयोग किए जाते हैं। Diosgenin का प्रयोग चिकित्सा विज्ञान में सेक्स हॉरमोन तथा गर्भ-निरोधक के अलावा बॉडी बिर्ल्डस द्वारा शरीर में testosterone hormones का स्तर बढाने के लिए भी किया जाता हैं।
प्रसिद्ध पर्यावरण विज्ञानी डॉ राजेंद्र डोभाल जी के अनुसार फार्मास्यूटिकल उद्योग में बढती मांग की वजह से तरूड़ का अवैज्ञानिक एवं अत्यधिक दोहन होने की वजह से रेड डाटा बुक ऑफ इण्डियन प्लाट्स ने Vulnerable पौधों की श्रेणी में रखा है। सन् 1998 में मोलर तथा वॉकर के सर्वे के अनुसार जंगलों में तल्ड(तरुड़) की 80 प्रतिशत संख्या कम हो गयी है और तभी से इसे आशंकित पौधों की श्रेणी में रखा गया था। Convention on International trade in Endangered species (CITES) के अनुसार जंगलों से उत्पादित सभी उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी गयी केवल व्यवसायिक रूप से उत्पादित उत्पादों को ही Legal Procurement Certificate (LPC) दिया जाता था। सन् 1997 से 2002 तक भारत की आयात-निर्यात नीति के तहत तरूड़ तथा तरूड़ से उत्पादित उत्पादों का फार्मालेशन के सिवाय पूर्णतः रोकथाम लगा दी गयी थी।
उपयोग सम्बन्धी चेतावनी:
इस लेख में तरूड़ के सम्बन्ध में जानकारी विभिन्न श्रोतों से एकत्र करके दी गयी है, इसे किसी भी प्रकार हमारे द्वारा औषधीय या चिकित्सकीय परामर्श ना समझा जाए। इसके औषधीय, चिकित्सकीय और व्यावसायिक उपयोग हेतु योग्य विशेषज्ञ से निर्देशन व परामर्श प्राप्त करें।
सन्दर्भ के लिए पढ़ें:
Wikipedia - DioscoreaUseful Tropical Plant - Dioscorea deltoidea
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