कुमाऊँ में जोशी लोगनक बार में

कुमाऊँ के ब्राह्मण, जोशी ब्राह्मणों की वंशावली, Kumauni Brahman, Kumaoni Joshi Brahman, Kumaon ke Joshi Brahman

कुमाऊँ में बामणनाक बार में जाण लियो जरा।
लेखक: भुवन चन्द्र पांडे

कुमाऊँ में जोशी लोगनक बार में बांकि रैई भाग-

गल्ली जोशी-
कत्यूरी राजा समय आंगीरस गोत्री द्वि भइ श्री नाथुराम व विजयराज ज्योतिषाचार्य कन्नौज बटि कुमाऊँ मे आईं और कार्तिकेयपुर नगर मे ठहरी।  उनकूं कत्यूर मे सेडे (सेणू) में जागीर मिली और राजदरवार में ज्योतिषी नियुक्त करिगो।  य सेढ्याल जोशी कहलाई, य लोग आपुं कूं खोरक पांडे वंशज बतूनी।  एक भाई कां पाला गांव जागीर में मिलौ।  यौ वंशाक लोग ज्यौतिषीक काम करंछी, मालाक जोशि कहलाई।  पं० रुद्र देव जोशिल "ज्यौतिषचन्द्रार्क" ग्रन्थ राजा बाजबहादुर चंदक समय बंड़ा।

सर्प और पल्यूड़ में लै एक भाइक संतान कैं जागीर मिली वां लै भौत सुयौग्य ज्यौतिर्विद भैंई।  ग्वालियर-दरबार में यौ वंशक पुरुष कैं दानाध्यक्षक पद मिलौ।  श्री रमापति दैवज्ञ अद्भुत ज्यौतिशी भंई।

श्री पद्मनिधि जोशी कैं गल्ली जागीर में मिलो तब बटि यों गल्ली जोशि कहलाईं।  सन १६२६ में राजा त्रिमल चंदक समय में श्री दिनकर जोशी ब्राह्मण लोगनक हिसाब लेखणि लेखक नियुक्त करि गो, सहायक दीवान बड़ाई गई तब बेटि गल्ली जोशी ले राज काज में भाग ल्हिंण भगेई।

य गोत्राक लोग जोशी चौड़ा, कपकोट, खखौली, हनेती, चौड़ा, खाड़ी, गणकोट, सर्प, पल्यूड़ा, कत्यूर, गल्ली, महिनारी, मसमौली और कुछ गढ़वाल मे रूनी।

भेरंग के जोशी-
मणकोटी राजाक समय डोटीक पीउठणा बटि श्री हरिशर्मा कौशिक गोत्री कान्यकुब्ज ब्राह्मण गंगोली में आय। ज्योतिष में प्रवीण हुणा कारण पोखरी गांव मिल तब बटि भेरंग या पोखरीक जोशि कईंण भैग्याय। राजा बहादुर चंदैक समय मनोरथ जोशी कैं जागीर मिली।  राजा उद्योत चंदाक समय ऋषीकेष जोशी कैं सेलोनी ग्राम ताम्रपत्र करबे दीइ गोय।  राज दरबार में ज्योतिशी रैईं और मालाक जोशि ने सहयोगी रैई।  चार राठ या चार घरान यनूमें ले छन। माधव जीक सन्तान छखाता में रूं,

लटौला जोशी-
पं० रुद्र दत्त पंत जीक अनुसार श्री शशि शर्मा कन्नोज बै चंद्रवंशक समय काली कुमाऊँ में आई।  गंगोली में मणकोटी राजाल आपंण राज्य में ठहरा , खटौला प्रभूति गांव जागीर में प्राप्त करी और खटौला जोशी कहलाई। रुद्र पंत ज्यू यौ लै कूनी कि ब्राहमण विद्वान छी पर जबान तुतलांछी यै लिजि उनकैं लाटो जोशी कूंछी।  उनौर लाट हुणा कारण गांवक नामें लाटौवाला फिर लटौली पड़ गौय और प्रसिध्द है गौय।  लटौली जोशी लटौली, उर्ग, भेटा, पाटिया, भैंसोड़ी, तिलाड़ी, सकतोली, जजूटा आदि गांव में रूनी।

शिल्वाल जोशी-
राजा सौम चंद समय असनी गांव कन्नौज बटि भरद्वाज गोत्री त्रिवेदी लंक राज तीर्थ यात्रा में कुमाऊँ में आईँ। यां शिलग्राम जागीर में मिली और शिल्वाल जोशी कहलाई।
इनौर वंशजो बटि पृथ्वी राज जोशी अल्माड़ आईं, अल्माड़ में श्रीचंद त्रिपाठील आंपणि कन्याक ब्या उनै दगै करबे अल्माड़ैक एक तिहाइ भूमि लै उनूकूं दैज में दि दे। राजल उनूकैं पुरोहिताई लै दी दे।
पृथ्वी राजैक तीन सन्तान भई
रुधाकर
दयाधर
भाष्कर
तीनै भइ भाल ज्योतिषी छी।
रुधाकर सन्तान जोशी खोला में रूनी।

दयाधर राजा लाल सिंह दगाड़ पुरोहित बड़ि बेर काशीपुर न्हैगोय ।दयाधर औलाद मकड़ी और खर्द में रूनी ऊं मकड़ी और खर्दाक जोशी कई जानी।

सैंजाक जोशी- भाष्करैकि संतान कैं बिशौत में सैंज, अुली प्रभूति गांव जागीर मे मिली सैंजाक जोशी कहलाई । यौं मुख्यत: अल्माड़ और बिसौत में रूनी।

चीनाखानाक जोशी-
चीनाखानाक जोशिनौक बार में कुमाऊं इतिहास मे बद्रीदत्त ज्यूल के खास नि लिख राख। जैले लिख राखो उकूं बिल्कुल उसी कै उतारी जांणो।
" पं० लीली नन्द जी के समय में एक वंशावली बनी है जिसमें लिखा है कु महाराज ज्ञानचंद के समय हरू और वरू नाम के दो ज्योतरविंद बंधु थे।
उनमे से जपाकर की संतान के श्रीहाट जागीर में मिला और वे सेलाखोला के जोशी कहलाये।
प्रभाकर जी को सिलग्राम जागीर में मिला।
नरोत्तम जी की संतान बिसौत मे बसी।
देव निधि की संतान मकीड़ी को गये।
रुधाकर जी की संतान पं० चन्द्रमणि जोशी गोरखा राज्य के समय फौजदार हुए उनको धुरी गांव जागीर में मिला धुरयाल कहलाये और बाद में चीनाखान में रहने से चीनाखान के जोशी कहलाये।
वाल्टन साहब ने लिखा ह कि ये जोशी किसी अल्मोड़ा के किसी जोशी से अपनी संबन्ध होने से प्रतिवाद करते हैं। वे कन्नौज के तीन ब्राह्मणों से अपना वंश चलना कहतेहैं।"

अगर कोई दगड़ी य मामल में के और महत्वपूर्ण जानकारी दि सकनी या के कमी देखनी तो सही करद्याल, यौ स्वागत योग्य हौल।
( संदर्भ - बद्री दत्त पाण्डे लिखित " कुमाऊँ का इतिहास" )
बी० सी० पाण्डे।

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