रचनाकार: दयाल पाण्डे
हे भारत भूमि तेरी बन्दे मातरम
हिमाला मुकुट तेरे पहाड़ विशाल छू
खुटा तवा सिंद देखो सागर कमाल छू
हाथ फैली रई येका पूरब पश्चिम
बन्दे मातरम बन्दे मातरम
हे भारत भूमि ..............
अलग छी बोली भाषा, अलग छी नामा
अलग- अलग कुड़ी अलग छू कामा
जस सारे फूल गथया राइ माला एकम
बन्दे मातरम बन्दे मातरम
हे भारत भूमी ...............
सीमा में पहर दिनी फोजिया जवान छी
धरती चीरना राइ कर्मठ किसान छी
विज्ञानी खोजने राइ पानी जूनम
बन्दे मातरम बन्दे मातरम
हे भारत भूमी .............
आंख नी दिखा पडोसी मानी जा तू बाता
तीन बार आइ गे छै मुक्क खाई लाता
खुत नी धारण ड्यूला आपु जागम
बन्दे मातरम बन्दे मातरम
हे भारत भूमि तेरी बन्दे मातरम
0 टिप्पणियाँ