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घुट -घुटा बटुली लागी यो परदेश मा
हे भारत भूमि तेरी बन्दे मातरम
अन्यारपट्ट रै नि सकूँ जल्दी ब्याली रात
कुमाऊँनी कविता - महंगाई
गिर्दा को समर्पित कविता - आज वरसों बाद शोर अई गया
आई के देखो, आई देखुला
भारत की नानी चेली, सिराना मैं बैठी छू
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