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गिर्दा को समर्पित कविता - आज वरसों बाद शोर अई गया



आज वरसों बाद शोर अई गया

गिर्दा की दूसरी पुण्यतिथि पर गिर्दा को समर्पित कविता
रचनाकार: दयाल पाण्डे

आज वरसों बाद शोर अई गया,
ही-भरी आँख डबडबाना है गया
कतुक चौमास आया लहै गया
हम द्योकाव जस रोज़ तिसानें रै गया

माया की उ पीड उ दुनिए सरम
हम माया की पीड लुकूने रै गया
के जानू की काव कब लझोड़ी दयूं
\हम ख़ाली मन में माव गठ्युने रै गया

छटी जालो यो अन्यार होलो उजाव
हम अमुसी जै रात काटने रै गया
फिर नई अवतार ल्ह्योल होलो निराव
हम दिनों दिन ढुंग पूजने रै गया

आज वरसों .....................

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