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कुमाऊँनी कविता - महंगाई

रचनाकार: दयाल पाण्डे 


तू डायन छै या कसाई छै
जानि को मुलुक बै आई छै
गरीबो पेटम लात मारी
तू सरकार की  पठाई  छै

पेट्रो डीजल पैलीकै खाई गिची
अब साग पात ली खाई है लो
गैस महेंग चुली निमाण ही गे
दाव स्वेणा देखिन है गे
चीनी चसक देखू नै
चाय धो ल्यून है रै
ढूध आब ३५ लै गो
पुसू चावो लै महंग है गो
गरीबो दुश्मण बनी बेर
तू घर घर आई छै
तू डायन छै या कसाई छै
सरकार की पठाई छै    

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