रचनाकार: दयाल पाण्डे
भारत की नानी चेली, सिराना मैं बैठी छू,
भली बाना भली वाणी देखिने की भली छू,
पुन्यु जैसी जुना जैसी सुकिली मुखडी छू,
सुकिली छू दांत पट्टी मुनई सुकिली छू,
द्वी खुटा( कूमाओं & गढ़वाल) मैं ठाड़ है रै दुनिया देखिने छू,
काफला किलीपी और बुरंशी धमेली छू
नैनी भीमताल आंख नंदादेवी नाख छू
हाथ फैलाई रयी अश्कोटा-आराकोटा छू
हरी -हरी आन्गाड़ी छू घाघरी हरिया छू
स्वर्ग की पारी जैसी धरती धरिया छू
तुप्कैली साडी और रंगाई पिछोड़ी छू,
देबभूमि देवता मैं जैसी देवी मैय्या छू,
xx xx xx xx
रिशाई रै, दुखी है रै मन मैं झुरिया छू
१० साल हई हैगिन जस की तस छू
सब कुछ पाल मैं छू फिर लै विवश छू
ताकि -ताकि देखि रै छ मन मैं सोचन छू
बंज रै गिन गाड़ा - भीड़ा मकानों मैं टला छू
खाली-खाली भितेरा छिन, भकारों मैं मूसा छिन
बटा-ग्वेहट नि छ, न घोठा डंगर छि
आपुन मुलुक आज आपुहों विराना छू
कैक मुख चानों कुनै सब तो बिमुखी छिन
प्रजा लै विमुखी और रजा लै बिमुखी छिन
सुडा -सुडी धात लगें आओ मेरा ननों कुनै
घर आओ बबा मेरा मिकुनी समाओ कुनै
द्वारा-महवा खोलो घर कैन बसाओ कुनै
आपण हुनर ईजा आपुहैं दिखाओ कुनै
हरी-भाई देवभूमि जाड नि सुकाओ कुनै
वीर सुता पहाड़ों का पहाड़ों मई आओ कुनै
परदेश नि जाओ आपु देश कैन समाओ कुनै
हिमाला बचाओ और हिमाला बसाओ कुनै
भली बाना भली वाणी देखिने की भली छू,
पुन्यु जैसी जुना जैसी सुकिली मुखडी छू,
सुकिली छू दांत पट्टी मुनई सुकिली छू,
द्वी खुटा( कूमाओं & गढ़वाल) मैं ठाड़ है रै दुनिया देखिने छू,
काफला किलीपी और बुरंशी धमेली छू
नैनी भीमताल आंख नंदादेवी नाख छू
हाथ फैलाई रयी अश्कोटा-आराकोटा छू
हरी -हरी आन्गाड़ी छू घाघरी हरिया छू
स्वर्ग की पारी जैसी धरती धरिया छू
तुप्कैली साडी और रंगाई पिछोड़ी छू,
देबभूमि देवता मैं जैसी देवी मैय्या छू,
xx xx xx xx
रिशाई रै, दुखी है रै मन मैं झुरिया छू
१० साल हई हैगिन जस की तस छू
सब कुछ पाल मैं छू फिर लै विवश छू
ताकि -ताकि देखि रै छ मन मैं सोचन छू
बंज रै गिन गाड़ा - भीड़ा मकानों मैं टला छू
खाली-खाली भितेरा छिन, भकारों मैं मूसा छिन
बटा-ग्वेहट नि छ, न घोठा डंगर छि
आपुन मुलुक आज आपुहों विराना छू
कैक मुख चानों कुनै सब तो बिमुखी छिन
प्रजा लै विमुखी और रजा लै बिमुखी छिन
सुडा -सुडी धात लगें आओ मेरा ननों कुनै
घर आओ बबा मेरा मिकुनी समाओ कुनै
द्वारा-महवा खोलो घर कैन बसाओ कुनै
आपण हुनर ईजा आपुहैं दिखाओ कुनै
हरी-भाई देवभूमि जाड नि सुकाओ कुनै
वीर सुता पहाड़ों का पहाड़ों मई आओ कुनै
परदेश नि जाओ आपु देश कैन समाओ कुनै
हिमाला बचाओ और हिमाला बसाओ कुनै

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