रचनाकार: दयाल पाण्डे
ढुंग बेच माट बेचीं, बेच खै पहाडा,
गंगा को पाणि बेच, आब बिजली घोटालाl
दुनिया सामानी उंला सरमा नि खूला,
आये के देखो इजा, आये के देखुलाll
नौवा सुखा, छौया सुखा, सुखाई है गधेरी,
खेती - पाति सुकै हालो, सुकै है धिनाईl
किसम - किसम कोट पैरी नोट मै कमूला,
आये के देखो इजा, आये के देखुलाll
गैरसैण आवाज़ आली, चुप्पी शादी रुला,
द्वी बार तो ठागे हाली आई लै ठगुलाl
देहरादून बैठी बैठी ख़जान भारुला,
आये के देखो इजा, आये के देखुलाl
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