
कुमाऊंनी होली
रचनाकार: मृदुला जोशी
बागन में ऐगे बहार म्हैंणा फागुण को
ऐगो छौ होली को त्यार म्हैंणा फागुण को।
किसम -किसम का फूल खिली रईं
धरती कैं छाजि रईं लुकुड़ नईं-नईं।
छै रै अजब बहार, म्हैंणा फागुण को। बागन में....
नवल बसन्तैकि छवि छौ न्यारी
हरि -भरि डा्न सब रंगिली क्यारी
छाजि रईं बन्दनवार, म्हैंणा फागुण को। ऐगोे छौ.....
घर-घर धूम मची रै होली
भरि-भरि देखिणईं छाजा और खोली
गीतन की झन्कार, म्हैंणा फागुण को। ऐगो छौ.....
अबिर-गुलाला्क भरि-भरि थाला
नाचणईं- गैणईं लोग निहाला
माति रईं खूबै होलियार, म्हैंणा फागुण को। ऐगो छौ....
बरसौं बरस सब खेलौ होली
जी-जागि रौ ना्नतिनन की टोली
भरि-पुरि सबनांका परिवार, म्हैंणा फागुण को। ऐगो छौ....
©मृदुला जोशी। गुड़गाँव।
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