कौंच, केवांच या दाकुली (Velvet Bean)

कौंच, केवांच या दाकुली एक उपयोगी जंगली औषधीय पौधा है, Kaunch or Velvet Bean a useful Medicinal Plant, Kaunch ki Sabji, Kaunch aushadhiya paudha

कौंच, केवांच या दाकुली (Velvet Bean)

महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पति

कुमाऊँ में कौंच और गढ़वाल में दाकुली के नाम से जाने जाने वाली जंगली बेल से हमारे पहाड़ में शायद सभी लोग परिचित होंगे।  पहाड़ के गाँवों में रहने वाले बच्चों ने इससे अपने दोस्तों के साथ कोई ना कोई शरारत भी जरूर की होगी।  कौंच या केवांच बंजर जमीन पर उगने वाली एक जंगली बेल होती है जिसकी फलियाँ सेम की आकृति वाली और बाहर से रोयेंदार होती हैं।  फलियों के रोयें हमारी त्वचा पर जबरदस्त खुजली पैदा करते हैं और फलियों के सूख जाने पर यह ज्यादा प्रभाव करते हैं।  जिस कारण किसी भी उपयोग के लिए इसकी फलियों को छूए बिना बड़ी सावधानी से तोड़ना पड़ता है।

कौंच या केवांच का परिचय (Introduction of Kaunch or Velvet Bean)

कौंच या केवांच (Velvet Bean) एक लता है इसे हम लोग बहुत ही साधारण-सी लता  समझते हैं लेकिन इसकी असल उपयोगिता कुछ और ही है।  हमारी पारम्परिक देशी चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद में कौंच या केवांच एक बहुत ही उत्तम औषधि है। केवांच (कौंच) का प्रयोग कई सामान्य व गंभीर रोगों के इलाज में किया जा सकता है।  विशेषज्ञों के अनुसार कुष्ठ रोग, योनि रोग तथा रक्त से संबंधित बीमारियों में केवांच (कौंच) के बीज से लाभ मिलता है।

कौंच या केवांच की बेल भारत के निचले हिमालयी क्षेत्रों और समस्त मैदानी प्रदेशों में बंजर जंगली स्थानों पर एक 10-12 फीट लम्बी एकवर्षीय शाकीय जंगली लता के रूप में पायी है।  इसका पौधा  वर्षा ऋतू में जंगली क्षेत्रों में अपने आप उग जाता है।  कौंच की बेल में इसके पत्ते 6 से 9 इंच लम्बे लट्टूवाकार और स्पष्ट पर्शिविक सिराओं से युक्त होते हैं।  इसके पत्तियाँ त्रिपर्णक व पर्णक, रोमिल तथा आकार अण्डाकार अर्धहृदयत होता है।  

कौंच के फूल 1 इंच तक लम्बे नीले और बैंगनी रंग के होते है, इसकी फली दिखने में सेम की फली जैसी लगभग 5 से 10 सेमी तक लम्बी होती है।  इसकी फलियों के प्रष्ठ भाग पर सघन रोम और पर्शुक होते है, अगर ये त्वचा को छू जायें तो इनसे त्वचा में खुजली, जलन और सुजन की समस्या हो सकती है, इसी फली में अन्दर 5 से 6 काले रंग के बीज होते है जिन्हें कौंच बीज कहा जाता है।

कौंच या केवांच (Velvet Bean), जिसे हम लोग बहुत ही साधारण-सी लता समझते हैं एक ऐसी लता है जिसकी असल औषधीय उपयोगिता कुछ और ही है।  हमारी पारम्परिक देशी चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद में कौंच या केवांच एक बहुत ही उत्तम औषधि है। केवांच (कौंच) का प्रयोग कई सामान्य व गंभीर रोगों के इलाज में किया जा सकता है।  विशेषज्ञों के अनुसार कुष्ठ रोग, योनि रोग तथा रक्त से संबंधित बीमारियों में केवांच (कौंच) के बीज से लाभ मिलता है।
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कौंच या केवांच क्या होता है? (What is kaunch or Velvet Bean?)

हम पहले से ही जानते हैं की यह एक रोयेंदार फलियों वाला जंगली बेलनुमा पौधा होता है।  वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार हमारे देश में कौंच या केंवाच की मुख्यतः दो प्रजातियां होती हैं।  एक प्रजाति जंगलों में होती है, इसकी फलियों पर बहुत अधिक रोएं होते हैं, जबकि इसकी एक दूसरी प्रजाति ऐसी भी है जिसकी सेम या बीन की तरह खेती की जाती है।  खेतों में उगायी जाने वाली इस दूसरी प्रजाति की कौंच की फलियों में कम रोएं पाए जाते हैं।

जंगल में पायी जाने वाली जंगली कौंच की फलियों पर घने और भूरे रंग के बहुत अधिक रोएं होते हैं।  अगर यह रोएं शरीर पर लग जाए तो बहुत तेज खुजली और जलन पैदा करते हैं, जिससे प्रभावित स्थान पर सूजन होने लगती है।  कौंच या केंवाच की फलियों के ऊपर ये रोएं बन्दर के रोम जैसे होते हैं जिनसे बन्दरों को भी खुजली उत्पन्न होती है।  इसलिए कौंच को मर्कटी तथा कपिकच्छू के नाम से भी  जाना जाता है।  वनस्पति शास्त्र के अनुसार कौंच या केवांच की दोनों प्रजातियां इस प्रकार से हैंः-
1. घरेलु खेती वाली कौंच या केंवाँच (Mucuna pruriens (Linn.) DC.
2. जंगली कौंच,केवाँच या काकाण्डोला (Mucunamonosperma Wight.)

विभिन्न भाषाओं में कौंच के नाम (Naomaclature of Kaunch/Velvet Bean)

वनस्पति विज्ञानियों के अनुसार कौंच का वानस्पतिक नाम Mucuna pruriens (Linn.) DC. (म्युक्युना प्रुरिएन्स) तथा Syn-Mucuna prurita (Linn.) Hook. है।  यह Fabaceae (फैबेसी) कुल का है। कौंच या केवांच को हमारे देश या विदेश में अनेक नामों से भी जाना जाता है जिनमें से कुछ निम्न  हैंः-

Hindi (kaunch in hindi) – कौंच, केवाँच, मर्कटी, कपिकच्छू, कौंछ, केवाछ, खुजनी आदि
English – हॉर्स आई बीन (Horse eye bean), वेल्वट बीन (Velvet bean), काउहेज (Cowhage), Common Cow itch (कॉमन कॉउ इच), Indian Viyagra Bean (इंडियन वियाग्रा बीन)
Sanskrit – कपिकच्छू, आत्मगुप्ता, मर्कटी, अजहा, कण्डुरा, प्रावृषायणी, शूकशिम्बी, वृष्या, कच्छुरा, व्यङ्गा, दुस्पर्शा
Bengali – अकोलशी (Akolshi), अलकुशा (Alkusha)
Marathi (kaunch beej in marathi) – खाज कुहिली (Khaz kuhili), कुहिली (Kuhili), कवच (Kavacha)
Telugu – पिल्लीयाडगु (Pilliyadagu)
Tamil – पुनैईककल्लि (Punaikkali)
Malayalam – नेक्कुरन (Neckuran)
Kannada – नासुगन्नी (Nassuganni)
Punjabi – कवांच(Kawanch), कूंच (Kunch)
Gujarati – कवच (Kavatch), कौंचा (Kauncha)
Oriya – कचु (Kachu), अलोकुशी (Alokushi)
Urdu – कवाँचा (Kavancha)
Nepali – काउसो (Kauso)
Arabic – हबुलकुलई (Habulkulai)
Persian – अनारेघोराश (Anareghorash)
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कौंच का रासायनिक संगठन (Chemical construction of Velvet Bean)

कौंच के बीजो में सामान्य परिस्थितियों में 9.1 % आद्रता रहती है, इसमें प्रोटीन 25.03%, सूत्र 6.75% और खनिज पदार्थ 3.95 % होते है।  आयुर्वेद चिकित्सा में औषधीय उपयोग के लिए कौंच की फली, बीज, रोम, पत्ते और जड़ सभी अंग प्रयोग में आते हैं।  कौंच में एल्केलाईड नामक यौगिक पाया जाता है जो अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह विष साबित होता है, जिसके कारण इसका उपयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए।  

इसके अतिरिक्त कौंच या केवांच के बीजो में डोपा (1.5%), ग्लुताथायोंन, लेसिथिन, गैलिक एसिड, ग्लूकोसाइड, निकोटिन, प्रुरियेनिन आदि रसायनक यौगिक पाए जाते हैं।  इसके बीजों से एक प्रकार का गाढ़ा तेल निकलता है।  कौंच के बीजों का विशेष उपयोग शारीरिक दौर्बल्यता, कामोतेज्जना, एवं मूत्र विकारो सम्बन्धी औषधीय उपकार में किया जाता है।  जिस कारण अंग्रेजी में इसे इंडियन वियाग्रा बीन के नाम से भी जाना जाता है।

कौंच के गुण धर्म (Properties of Velvet Bean/Kaunch)
कौंच का रस मधुर, तिक्त, यह स्वाभाव में गुरु और स्निघ्ध तथा इसका वीर्य उष्ण होता है अर्थात कौंच के बीज की तासीर गरम होती है।  पाचन के पश्चात कौंच के बीज का विपाक मधुर होता है।  यह वातशामक और कफपित्त वर्द्धक है तथा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में  इससे वानरी गुटिका, माषबलादी आदि औषध योग बनाये जाते हैं।

कौंच या केवांच के उपयोग और लाभ (Uses and benefits of Vevet Bean/Kaunch)

आयुर्वेद विशषज्ञों के अनुसार, विभिन्न रोगों के उपचार के लिए कौंच की पत्तियां, बीज, जड़, रोम आदि का उपयोग किया जाता है। हम सभी ने कौंच की बेल को कहीं ना कहीं पर देखा तो जरूर होगा, लेकिन कौंच के फायदे से अनजान होने के कारण इसकी उपयोगिता से अनजान ही हैं। इसलिए आज हम जानने का प्रयास करते हैं कि कौंच के बीज व अन्य भागों से विभिन्न रोगों में क्या-क्या लाभमिल सकता है।

कौंच पाक (Kaunch Pak)
शक्तिवर्धक आयुर्वेदिक टॉनिक रूप में प्रयोग किया जाने वाले "कौंच पाक"  में कौंच या केवांच एक मुख्य अवयव होता है।  कौंच पाक में कौंच बीज, सफ़ेद मुसली, वंस्लोचन, त्रिकटु, अश्वगंधा, चातुर्जात, दूध , शहद और घी जैसे पौष्टिक द्रव्य होते हैं।  आयुर्वेद के अनुसार ये नपुंसकता को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखते हैं।  विशेषज्ञोंके अनुसार कौंच पाक के इस्तेमाल से शीघ्रपतन, अंग का ढीलापन, धातु दुर्बलता, शारीरिक दुर्बलता, शुक्राणुओं की कमी आदि से में लाभ होता है तथा यह पाचन, स्मृति और शारीरिक बल को बढ़ाता है।

कौंच पाक को अधिकतर सर्दियों में उपयोग करना अधिकलाभकारी माना जाता है।  इसे बनाने के लिए कौंच बीजो का इस्तेमाल मुख्य अवयव केरूप में होता है।  चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार नपुंसकता, धातु दुर्बलता, वीर्य में शुक्राणुओं की कमी, शीघ्रपतन एवं शारीरिक दुर्बलता आदि में इसका सेवन करने से चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते हैं।
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कौंच पाक को बनाने की विधि बहुत मुश्किल नहीं है और बाज़ार से इसे खरीदने से अच्छा है की आप इसे घर पर ही तैयार कर सकते हैं।  किसी विशेषज्ञ के परामर्श पर इसे बनाने की विधि भी आसान और यह पूर्णतया लाभकारी होगी एवं यह बाज़ार में मिलने वाले कौंच पाक से बेहतर भी रहेगा।  इसके बनाने के लिए निम्न सामग्री की आवश्यकता होती है:-
कौंच बीज –        250 ग्राम
गाय का दूध –         4 किलो
गाय का घी –      500 ग्राम
अकरकरा चूर्ण –     5 ग्राम
रस सिन्दूर –           5 ग्राम
केसर –                 3 ग्राम
प्रक्षेप के लिए –      दालचीनी, लौंग, इलायची, चव्य, चित्रक, पीपलामूल, आदि सामान मात्रा में 40 ग्राम

बनाने की विधि:– 
सबसे पहले कौंच के बीजों को ऊपर बताई गई मात्रा में 8 से 10 घंटो के लिए भिगो लेते हैं, इसके बाद अच्छी तरह भीगे बीजों के ऊपर के छिलके को हटा लिया जाता है और बीजों को फिर से धूप में सुखाया जाता है।  जब बीज अच्छी तरह सुख जाते हैं तब इन्हें बारीक़ पीसकर बीजों का चूर्ण बनाया  जाता है।  अब इस तैयार चूर्ण को घी में सुनहरा लाल होने तक भून लिया जाता है।  फिर इसे दूध में डालकर उबाला जाता है एवं इसका मावा तैयार किया जाता है।  फिर प्रक्षेप द्रव्य मिलाकर चीनी की चाशनी में डालकर एवम सब भस्में व अन्य अवयव मिलाकर अंत में शहद मिलाया जाता है।

आयुर्वेद विशषज्ञों के अनुसार, विभिन्न रोगों के उपचार के लिए कौंच की पत्तियां, बीज, जड़, रोम आदि का उपयोग किया जाता है। हम सभी ने कौंच की बेल को कहीं ना कहीं पर देखा तो जरूर होगा, लेकिन कौंच के फायदे से अनजान होने के कारण इसकी उपयोगिता से अनजान ही हैं। इसलिए आज हम जानने का प्रयास करते हैं कि कौंच के बीज व अन्य भागों से विभिन्न रोगों में क्या-क्या लाभमिल सकता है।

कौंच के औषधीय उपयोग (Medicinal uses of Velvet Bean/Kaunch)

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार कौंच के विभिन्न औषधीय उपयोग का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है:-

कब्ज की समस्या में कौंच के फायदे  (Benefits of Velvet Bean/Kaunch in fighting with Constipation)
कौंच के पत्ते का काढ़ा 10-20 मिली मात्रा में पीने से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है तथा इस काढ़े से पेट के कीड़े खत्म हो सकते हैं।
कौंच के सेवन से दस्त का इलाज (Velvet Bean/Kaunch is beneficial to stop Diarrhoea)
बराबर मात्रा में बला, बड़ी कटेरी, शालपर्णी, केवाँच मूल (कौंच की जड़) तथा मुलेठी का पेस्ट बनाकर इसको घी में पका लिया जाता है।  फिर घी की 5 ग्राम मात्रा में मधु मिलाकर सेवन किया जाता है जिससे शूल वाले दस्त में लाभ मिलता है।
कौंच के सेवन से पेचिश का इलाज (Use of Velvet Bean/Kaunch to stop Dysentery)
5-10 ग्राम कौंच या केवाँच की जड़ के पेस्ट को तण्डुलोदक (चावल के धोवन) के साथ पीने से पेचिश ठीक होती है।
कौंच के जड़ से बने क्षीर को पकाकर 20-40 मिली की मात्रा में पीने से वात दोष के कारण होने वाली दस्त की समस्या में लाभ प्राप्त होता है।

जलोदर रोग में कौंच के फायदे (Benefits of Velvet Bean/Kaunch in Ascites Treatment)
कौंच (केवाँच) के जड़ को पीसकर पेट पर लगाने से जलोदर रोग में लाभ होता है।
सिर दर्द में कौंच (केवांच) के फायदे (Velvet Bean/Kaunch bring relief from Headache)
कौंच की पत्तियों को पीसकर सिर पर लगाने से सिर दर्द से राहत मिलती है।
स्नायु रोग में केवांच के लाभ (Velvet Bean/Kaunch is beneficial to cure Nervous System)
1 ग्राम कौंच की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से स्नायु रोग में लाभ प्राप्त होता है।
कौंच से सांसों की बीमारी का उपचार (Benefits of Velvet Bean/Kaunch in Respiratory Disease)
कौंच (केवाँच) के 1-2 ग्राम बीज के चूर्ण को मधु तथा घी के साथ मिलाकर चाटने से सांसों की बीमारी में लाभ मिलता है।

किडनी विकार में कौंच से लाभ (Velvet Bean/Kaunch is benficial for Kidney Disorder)
कौंच (केवाँच) के जड़ का काढ़ा 10-20 मिली की मात्रा में पीने से किडनी विचार, पेशाब से संबंधित समस्या (मूत्र रोग) और हैजा में लाभ प्राप्त होता है।
कौंच (केवाँच) की जड़ तथा झिंझिणिका (जिंगना) के पत्ते के रस को 1-2 बूंद नाक में डालने से ग्रीवा, बाहु (भुजा या कंधे से लेकर कोहनी तक) के रोग ठीक होते हैं।
लकवा (पक्षाघात) के उपचार में कौंच के औषधीय उपयोग (Velvet Bean/Kaunch uses in fighting with Paralysis)
बराबर मात्रा में  कौंच के बीज, उड़द, एरण्ड की जड़ तथा बलामूल का काढ़ा (10-30 मिली) बनाकर इसमें हींग तथा सेंधा नमक मिलाकर पीने से लकवा (पक्षाघात) में बहुत लाभ होता है।

योनि के ढीलेपन की समस्या में कौंच का प्रयोग (Velvet Bean/Kaunch is helpful in Vaginal Laxity)
कौंच की जड़ के काढ़े को योनि को धोने तथा पिचु धारण करने से योनि के ढीलेपन की समस्या में लाभ मिलता है।
कौंच के बीज का ल्यूकोरिया ले इलाज में प्रयोग (Velvet Bean/Kaunch is beneficial for Leucorrhea)
आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार 1-2 ग्राम कौंच के बीजों को खाने से ल्यूकोरिया के उपचार में लाभ होता है और ल्यूकोरिया धीरे-धीरे ठीक हो जाता है।
मासिक धर्म सम्बन्धी विकारों में कौंच का उपयोग (Use of Velvet Bean/Kaunch for Menstrual Disorder)
चिकित्सकों के अनुसार कौंच के बीजों (कौंच बीज) की खीर मिलाकर खिलाने से मासिक धर्म विकार में लाभ होता है।

डायबिटीज के उपचार में कौंच का उपयोग (Benefits of Velvet Bean/Kaunch in controlling Diabetes)
कौंच के बीजों को छाया में सुखाकर बीजों को पीसकर बने 5 ग्राम चूर्ण को दूध में पकाकर पिलाने से डायबिटीज में लाभ होता है।
मूत्र विकार (पेशाब से संबंधित रोग) के उपचार में कौंच का उपयोग (Benefits of Velvet Bean/Kaunch for treating Urinary Disease)
कौंच के बीज को पीसकर बने 1-2 ग्राम चूर्ण को पानी के साथ सेवन करने से मूत्र विकारों (पेशाब संबंधित रोग) के उपचार में लाभ होता है।  इसके प्रयोग से शरीर हृष्ट-पुष्ट और स्वस्थ बनता है।
घाव सुखाने के लिए कौंच का उपयोग (Benefits of Velvet Bean/Kaunch for Wound Healing)
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार कौंच के पत्ते को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है। 

पुरुष बांझपन को दूर करने में कौंच के उपयोग (Benefits of Velvet Bean/Kaunch in Impotency)
पुरुष के बांझपन की समस्या में कौंच के बीज का सेवन फायदेमंद होता है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार इसमें वाजीकरण का गुण पाया जाता है जिससे ये पुरुष की अंदरुनी कमजोरी को दूर करने में मदद करता है।
कौंच के बीज का सेवन बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करता है (Benefits of Velvet Bean/Kaunch to decrease Age Related Problems)
कौंच के बीज का चूर्ण बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने में मदद करता है क्योंकि इसमें एंटी एजिंग का गुण पाया जाता है साथ ही आयुर्वेद के अनुसार इसमें बल्य का गुण होने से यह बढ़ती उम्र के कारण आयी कमजोरी को भी दूर करने में सहायता करता है। 

कामशक्ति बढ़ाने में कौंच का उपयोग (Velvet Bean/Kaunch increases Sexual Stamina)
2 ग्राम कौंच के बीज के चूर्ण में 1 ग्राम गोखरू के बीज का चूर्ण तथा 5 ग्राम मिश्री मिला लें। इसे दूध के साथ खाने से कामशक्ति बढ़ती है।
बराबर मात्रा में केवाँच के बीज, गोक्षुर, अपामार्ग बीज, छिलका-रहित जौ तथा उड़द को लें।  इसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-4 ग्राम की मात्रा में लेकर गाय के दूध में मिलाकर या पकाकर सेवन करें। इससे सेक्सुअल स्टेमना में बढ़ोतरी होती है।
कौंच के बीज तथा तालमखाना के (2-4 ग्राम) चूर्ण में शर्करा मिलाकर इसे तााजे दूध के साथ सेवन करने से शुक्राणु रोग में लाभ होता है।
20-30 मिली उड़द के सूप में 1-2 ग्राम केवाँच बीज का चूर्ण मिलाकर पीने से कामशक्ति बढ़ती है।
2 ग्राम कौंच बीज तथा 2 ग्राम गोखरू को बराबर भाग में मिश्री मिलाकर पीसकर बने पाउडर की 1-2 ग्राम की मात्रा में शहद तथा दूध के साथ लेने से कामशक्ति में बढ़ोतरी होती है।
कौंच के बीज, शतावरी, गोखरू, तालमखाना, नागबला और अतिबला को बराबर की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लिया जाता है।  रात को सोने से पहले इसका रोज  5 ग्राम की मात्रा में इस्तेमाल गुनगुने दूध के साथ करने से सहवास का समय बढ़ता है और नामर्दी, शीघ्रपतन, धातु दुर्बलता में बेहतरीन परिणाम मिलेगा।

मस्तिष्क स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद कौंच के बीज (Velvet Bean/Kaunch Seed is beneficial to boost Mental Health)
कौंच बीज के पाउडर का उपयोग मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में फायदेमंद होता है क्योंकि माना जाता है की कौंच बीज का चूर्ण टॉनिक की तरह काम करता है।
बिच्छू का डंक लगने पर कौंच के बीज फायदेमंद (Velvet Bean/Kaunch is beneficial in Scorpion Bite)
कौंच के बीज को पीसकर इसके चूर्ण को बिच्छू के डंक वाले स्थान पर लगाने से बिच्छू के विष का प्रभाव काम होने लगता है।
कौंच की जड़, गूलर तथा झिंझिणिका (जिंगना) के बराबर भाग  रस में हींग मिलाकर इसकी 1-2 बूंद नाक में डालने से अवबाहुक रोग में लाभ प्राप्त होता है।
एक माह तक नियमित कौंच के बीज के रस (10-20 मिली) को पीने से भी अवबाहुक रोग ठीक होता है।

कौंच की हरी फलियों की सब्जी:

कौंच के औषधीय महत्व के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है पर कौंच की घर पर उगाई जाने वाली प्रजाति को सब्जी के रूप में खाने के लिए भी उपयोग में लाया जा सकता है।  कौंच की कच्ची हरी फलियों को चुनकर उसकी सब्जी बिल्कुल उसी प्रकार बनायी जा सकती है जैसे हम सेम की फलियों की सब्जी बनाते हैं।  इसकी सब्जी को सूखा, आलू और अन्य सब्जियों के साथ मिक्स सूखा तथा रसदार भी बनाया जा सकता है।  वैसे भी सेम की फलियां और घरेलु कौंच की हरी फलियां लगभग सामान सी ही होती हैं।  स्वाद में कुछ की फलियों की सब्जी का स्वाद लगभग सेम की फलियों की सब्जी  जैसा ही होता है।

अमर उजाला समाचार पत्र में, पूर्व में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में लोग कौंच को उगा कर उसकी सब्जी बनाकर खाते हैं। यहां बाजार में कौंच की फलियां 40-५०  रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर मिल जाती हैं।  वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डा. रामचंद्र उनियाल बताते हैं कि कौंच उम्र बढ़ाने वाली दवा के साथ-साथ पौष्टिक सब्जी भी है।  जंगल में दाकुली छेमी के नाम पहचान रखने वाली राजमा कुल के कौंच की अब सब्जी वाली प्रजाति विकसित हो चुकी है।   कौंच की सब्जी वाली प्रजाति की यहां बड़कोट, गणेशपुर, जामक, कामर, गंगोरी, सिरोर, स्यूणां आदि गांव में एक दो किसानों ने कुछ फसल तैयार की है। कौंच की सब्जी का कारोबार करने वाले सब्जी विक्रेता बताते हैं कि कुछ ही किसान घर में कौंच की एक दो बेल लगाकर बाजार में बेच रहे हैं।

इस प्रकार हम कह सकते हैं की कौंच मात्र एक जंगली बेल ही नहीं हो पर यह औषधीय व अन्य व्यावसायिक उपयोगों वाला एक बहुपयोगी पौधा है।  अगर इसकी व्यावसायिक रूप से खेती की जाती हो तो यह सीमित रूप से हमारे प्रदेश में रोजगार और कुछ कृषकों की आय को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।  इसके लिए सम्बंधित द्वारा उचित प्रयास और मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी।

कौंच (Himalayan Velvet Bean) के औषधीय उपयोग सम्बन्धी चेतावनी:

इस लेख में केवल कौंच के औषधीय गुणों एवं उपयोगों के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी है, इसे किसी भी प्रकार हमारे द्वारा औषधीय या चिकित्सकीय परामर्श ना समझा जाए।  कौंच एक औषधीय पौधा है जिसका प्रयोग विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में होता है।  इसका औषधीय या चिकित्सकीय प्रयोग केवल योग्य विशेषज्ञ चिकित्सक के निर्देशन व परामर्श से ही किया जाना चाहिए।

सन्दर्भ के लिए पढ़ें:

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