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भुजा, भुजेला, पेठा या कुम्हड़ा (Ash Gourd)


भुजा, भुजेला, पेठा या कुम्हड़ा (Ash Gourd)
लेखक: शम्भू नौटियाल

भुजा(भुजेला),पेठा या कुम्हड़ा संस्कृत में कुष्माण्ड, अंग्रेजी में विंटर मेलन या एश गार्ड के नाम से जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम: बेनिनकेसा हिस्पिडा (Benincasa hispida) है तथा कुकरबिटेसी (Cucurbitaceae) कुल से संबंधित है। यह एक बेल पर लगने वाला हल्के हरे वर्ण का फल होता है। पूरा पकने पर यह सतही बालों को छोड़कर कुछ श्वेत धूल भरी सतह का हो जाता है। 

इसकी अधिकांश खेती भारत सहित दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में होती है लेकिन उत्तराखंड की जलवायु पेठा(भुजा) के लिए काफी मुफीद है। इसको उगाने से फायदे की बात यह भी है कि इसकी फसल में कोई रोग भी नहीं लगता। शंकराचार्य द्वारा उत्तराखंड में मठ स्थापना के बाद दक्षिण भारतीय ब्राह्मण इसे गढवाल लाये थे तब से पहाड़ी सब्जियों में इसे यहाँ उगाया जाता है लेकिन कुछ वर्षों से इसे यहाँ कम तब्बजो नहीं मिल रही है। जबकि भुजा (भुजेला) व उड़द दाल (मास) से तैयार बड़ी भोजन का एक अच्छा स्रोत है।


इससे भारत में एक मिठाई भी बनती है, जिसे पेठा (मिठाई) ही कहते हैं। यह लता वार्षिकी, कठिन श्वेत रोमों से आवृत 5-6 इंच व्यास के पत्तों वाली होती है। पुष्प के साथ अंडाकार फल लगते हैं। कच्चा फल हरा, पर पकने पर श्वेत, बृहदाकार होता है। यह वर्षा के प्रारंभ में बोया जाता है। शिशिर में फल पकता है। बीज चिपटे होते हैं। इसके एक भेद को क्षेत्रकुष्मांड, भतुआ या कोंहड़ा कहते हैं, जो कच्ची अवस्था में हरा, पर पकने पर पीला हो जाता है। यह क्यारीयों में बोया जाता अथवा छप्पर पर लता के रूप में चढ़ाया जाता है।

यह भारत में सर्वत्र उपजता है। कुम्हड़ा या फेठा से भारत में एक बेहद ही विशेष मिठाई पेठा बनाया जाता है। आगरा क्षेत्र में जहां ताजमहल है वहीं इस मिठाई को एक अलग पहचान भी मिली है। आगरे का पेठा न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में मशहूर है। पेठे की मिठाई कई स्वाद और खुशबू में मिलती है, जिसमें से अंगूरी पेठा, नारियल पेठा, सूखा पेठा व काजू पेठा वगैरह इसकी कुछ खास वैरायटी होती हैं। पेठा से रंग बिरंगी टूटी फ्रूटी भी बनाई जाती है. जिसका उपयोग आइसक्रीम में, मीठी ब्रेड़ बनाने, केक, शेक इत्यादि में किया जाता है। इसके अलावा, इससे लड्डू और हलवा भी बनाया जाता है. इसके बीज को ड्राय फ्रूट के रुप में भी उपयोग किया जाता है।


पेठा(भुजा) पोषण के लिए भी उत्तम है क्योंकि इसमें विटामिन बी 1 और बी 3 और विटामिन सी शामिल हैं। इसमें कैल्शियम, सोडियम, जस्ता, लोहा, फास्फोरस, मैंगनीज, तांबा, मैग्नीशियम, सेलेनियम और पोटेशियम जैसे विभिन्न खनिज भी शामिल होते हैं। पोटेशियम में इसकी उच्च सामग्री के कारण, यह रक्तचाप के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। इसमें लगभग 96% पानी होता है। इसलिए जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उनको इसका सेवन करना चाहिए। पेठा हमारे शरीर को पुष्टिकरण बल देने वाला और खून को साफ करता है। पेठा(भुजा) पेट को साफ रखता है। पेठे पूरी तरह से प्राकृतिक होता है जिसे व्रत में आसानी से खाया जा सकता है। फलहार में पेठा भी आता है।



प्राचीन ग्रथों में पेठे को शरीर को अंदर से ताकत देने वाला और शक्तिवर्धक उत्तम फल कहा गया है। कच्चा पेठा(भुजा) वात और पित्त दोष को खत्म करता है। लेकिन ध्यान रखें पेठा ज्यादा कच्चा न हो। रक्तशोधन, मानसिक रोगों के उपचार, मूत्राशय की समस्या और पेट की जलन को खत्म करने में भी सहायक है। लेकिन ध्यान रहे कि अधिक कच्चा पेठा व अधिक पका हुआ पेठा भी नहीं खाना चाहिए यह कफ को पैदा करता है।

 

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