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रामकरेला या मीठा करेला (Caigua or Achuqcha)

रामकरेला, एक पतली बेल वाली पहाड़ी सब्जी है। Cyclanthera pedata or Achuqcha is Ramkareli in Kumauni

रामकरेला या मीठा करेला (Caigua or Achuqcha)

लेखक: शम्भू नौटियाल\

मीठा करेला या रामकरेला, वानस्पतिक नामः सिलेंथरा पेडाटा (एल) स्चार्ड (Cyclanthera pedata (L.) Schrad) जो पादप कुल कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) से संबंधित है। यह समुद्रतल से लगभग 2600 मीटर तक की ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में अगस्त से लेकर नवंबर तक उगने वाली पहाड़ी सब्जी है। वास्तव में यह एक पतली बेल है जो 12 मीटर तक लंबी व पत्तियां 24 सेंटीमीटर तक लंबी होती हैं। इस पर छोटे फूल हरे या सफेद रंग के हो लगते हैं। इसका फल हल्का हरा, अंडाकार, घुमावदार, 15 सेमी तक लंबा, लगभग खोखला, चिकनी त्वचा के साथ या कभी-कभी नरम रीढ़ में ढका होता है इसके बीज पकने पर काले होते हैं।

पहाड़ में बरसात की सब्जियों के आखिरी पायदान पर यह लोगों के पोषण के काम आता है। छोटे-छोटे कांटों वाली यह सब्जी मिनटों में तैयार हो जाती है। इसकी सब्जी धीमी आंच पर पकाई जाती है। इसके फल पोटेशियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस के स्रोत हैं। फलों का स्वाद ककड़ी जैसा या अन्यथा बेस्वाद भी हो सकता है। यह आम प्रचलित करेले की तरह कड़वा नहीं होता। उत्तराखण्ड के अलावा भारत के अन्य हिस्सों के साथ यह दक्षिण अमेरिका में भी पाया और खाया जाता है। पेरू में इसे काइवा कहते हैं। पहाड़ की संस्कृति की व यहां के खान-पान की बात ही अलग है।

मीठा करेला, जिसे अलग-अलग जगहों पर अलग नाम से जाना जाता है। यह करेला कड़वा नहीं बल्कि मीठा होता है। मीठे होने के कारण इसको मीठा करेला कहते है। कुछ लोग इसे परमला कहते हैं कई जगह ये ककोड़ा के नाम से जानी जाती है। शहरों में इसे राम करेला कहा जाता है। इस सब्जी का नाम राम करेला क्यों पड़ा यह तो किसी को पता नहीं, परंतु इसे ये नाम इसके गुणों की वजह से मिला है। क्योंकि इसमें औषधीय गुण पाये जाने के कारण रामबाण या राम करेला और एक मान्यता यह भी है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान इस सब्जी का सेवन किया था तभी से इसे राम करेला कहा जाने लगा।

इसे गुजकरेला, किंकोड़ा और घुनगड़ी भी कहा जाता है। अगर आप ठेठ पहाड़ी हैं तो राम करेले की सब्जी आपने जरूर खाई होगी।  यह पहाड़ी सब्जी गुणों की खान है। अगर हम इसके गुणों के बारे में जानना शुरू करेंगे तो अवश्य ही इस पहाड़ी सब्जी के मुरीद हो जाएंगे। एक शोध में पता चला है कि इसमें न केवल पर्याप्त मात्रा में आयरन मौजूद है, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट और खून को साफ करने वाले तत्व भी हैं। यह शरीर में आयरन तत्व के अभाव या कमी में से एनीमिया, सिरदर्द या चक्कर आना, हीमोग्लोबिन बनने में परेशानी होना जैसी परेशानियां शरीर को पस्त कर देती हैं। इसके अलावा एंटीऑक्सिडेंट अक्‍सर अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य और बीमारियों को रोकने का काम करते है।

कैंसर से बचाने, आंखों की रोशनी के लिए, मजबूत लिवर के लिए एंटी ऑक्सीडेंट शानदार चीज है। यह फाइबर, प्रोटीन और कॉर्बोहाइड्रेट की भी खान है। इसके पौधे पर बीमारियों का प्रकोप भी नहीं होता, यह पहाड़ों में खूब पनपता है। अब तो देहरादून व हल्द्वानी जैसे शहरों में खूब मिल जाता है। राम करेला पौष्टिकता के साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है।  इसके फल मूत्रवर्धक हैं व दूध में उबालकर टॉन्सिलिस्ट का उपचार भी किया जा सकता है। इसका रस उच्च रक्तचाप के अलावा खून में कोलेस्ट्राल के स्तर को भी ठीक रखता है। यह धमनी रोग, संचार समस्याओं और शुगर के इलाज में भी कारगर है।

कड़वा करेला जहां डायबिटीज का दुश्मन है, वहीं मीठा करेला भी डायबिटीज की प्रभावशाली दवा है।  राम करेला सभी तरह के चर्म रोग व जलन में भी यह उपयोगी है। इसकी पत्तियों का रस पेट के कीड़ों को मारने सहायक है। इसका स्वरस कील-मुहांसों को ठीक करने के भी काम आता है, जबकि इसकी जड़ को सुखाकर बनाया गए चूर्ण का लेप चर्म रोगों के लिए बहुत उपयोगी है।


श्री शम्भू नौटियाल जी के फेसबुक पोस्ट से साभार
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