तुन (तूणी) या तोण (Indian Mahogany)

तुन या तूणी (Indian Mahogany) एक बहुपयोगी काष्ठ और औषधीय पादप है। Toona ciliata M Roem or Indian Mahogany or Red Cedar has industrial and medicinal use

तुन (तूणी) या तोण (Indian Mahogany)

लेखक: शम्भू नौटियाल

तुन (तूणी) या तोण वानस्पतिक नाम तूना सीलिएटा (Toona ciliata M. Roem. Syn-Cedrela toona Roxb.ex Rottler ). कुल मीलिऐसी (Meliaceae : Neem family) से संबंधित है। हिन्दी में इसे तून, तूनी, महानिम संस्कृत में तूणी, तुन्नक, आपीन, तुणिक, कच्छक, कान्तलक तथा अंग्रेजी में इण्डियन महोगनी (Indian mahogany), रेड सीदार (Red cedar) कहते हैं।

यह एक बहुत बड़ा वृक्ष जो उत्तराखंड सहित पूरे भारत में लगभग 1300 मीटर की ऊंचाई तक प्राप्त होता है। इसकी ऊँचाई पचास फुट से लेकर सत्तर- अस्सी फुट तक व मोटाई या परिधि 5 से 7 फुट तक हो सकती है। इसकी पत्तियाँ नीम की तरह लंबी लंबी पर बिना कटाव की होती हैं।  शिशिर में यह पेड़ पत्तियाँ झाड़ता है। बसंत के आरंभ में ही इसमें नीम के फूल की तरह के छोटे छोटे फूल गुच्छों मे लगते हैं जिनकी पँखुड़ियाँ सफेद पर बीच की घुँडियाँ कुछ बड़ी और पीले रंग की होती है। इन फूलों से एक प्रकार का पीला बसंती रंग निकलता है। पुष्पन एवं छोटे फल मार्च से जून तक लगते हैं। झड़े हुए फुलों को लोग इकट्ठा करके सुखा लेते हैं। सूखने पर केवल कड़ी कड़ी घुँडियाँ सरसों के दाने के आकार की रह जाती है जिन्हें साफ करके कूट डालते या उबाल डालते हैं। 

तुन की लकड़ी का उपयोग:

तुन की लकड़ी लाल रंग की और बहुत मजबूत होती है। इसमें दीमक और घुन नहीं लगते। घरों के चौखट तथा मेज, कुर्सी, आदि सजावट के समान बनाने के लिये इस लकड़ी की बड़ी माँग रहती है। आसाम में भी चाय के बक्से भी इसी लकड़ी के बनते हैं। यह वृक्ष पर्यावरण के लिए भी अति उपयोगी है क्योंकि इसकी पत्तियों से बनने वाली खाद खेतों को उपजाऊ बनाने का काम करती है।

तून को तूनी या महानिम भी बोला जाता है। तून एक औषधीय पादप है, और सिर दर्द, दस्त, मासिक विकार आदि में तून के इस्तेमाल से फायदा होता है। तून के औषधीय गुण का प्रयोग जनन अंगो के विकार, मोच, शरीर में घाव, फोड़े-फुन्सी तथा टाइफाइड, पुराना बुखार व पेचिश में भी तून के सेवन से लाभ मिलता है। The Pharmaceutical Biology Journal 2003 के अनुसार तून की छाल कार्डियोटोनिक है और अल्सर, कुष्ठ और गठिया के उपचार में उपयोगी है। (The bark of T. ciliata is cardiotonic and useful in the treatment of ulcers, leprosy and rheumatism.) कवकनाशी गुण (antifungal activity) भी मौजूद होता है।
तुन या तूणी (Indian Mahogany) एक बहुपयोगी काष्ठ और औषधीय पादप है। Toona ciliata M Roem or Indian Mahogany or Red Cedar has industrial and medicinal use

तून के औषधीय उपयोग:
तूणी रक्त: कटु: पाके कषायो मधुरो लघु।
तिक्तो ग्राही, हिमो वृष्यो व्रण कुष्ठास्त्रपित्तजित्।।
परंपरागत रूप से, यह पुरानी पेचिश, त्वचा रोग,कुष्ठ रोग, बुखार, न्यूमोनिया बुखार, सिरदर्द, रक्त की शिकायत, खांसी, अस्थमा, लकवा, कार्डियोटोनिक, कामोद्दीपक और अल्सर में उपयोगी है। (Traditionally, it is useful in chronic dysentery, leprosy, cures fever, pnemonia fever, headache, blood complaints, cough, asthma, paralysis, cardiotonic, aphrodisiac, and ulcer.) आयुर्वेद के अनुसार तून मधुर, तिक्त, कटु, कषाय, शीत, लघु, पित्तशामक, ग्राही, वृष्य, दीपन तथा रोचन होता है। तून की छाल अति-संकोचक (ग्राही), ज्वरघ्न, पौष्टिक व ज्वरनाशक होती है। तून के पत्र वेदनास्थापक एवं शोथहर होते हैं। तून के पुष्प गर्भाशय संकोचक तथा रजस्थापक होते हैं। तून के औषधीय गुण, प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-
सिर दर्द में तूनी के प्रयोग से फायदा मिलता है। तूनी तून की छाल और पत्ते को पीसकर गुनगुना करके इसका लेप करने से वातज दोष के कारण होने वाले सिर दर्द से आराम मिलता है। बेहतर लाभ के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।
तुन या तूणी (Indian Mahogany) एक बहुपयोगी काष्ठ और औषधीय पादप है। Toona ciliata M Roem or Indian Mahogany or Red Cedar has industrial and medicinal use

दस्त से परेशान होने पर आप तूनी के औषधीय गुण से लाभ ले सकते हैं। तून की छाल का काढ़ा बना लें। इसकी 10-15 मिली मात्रा को पिएं। इससे दस्त पर रोक लगती है।
मोच आना एक आम समस्या है। किसी भी व्यक्ति को मोच आ सकती है। अगर आप मोच के इलाज के लिए तूनी को उपयोग में लाएंगे तो उत्तम लाभ मिलेगा। तूनी की छाल को पीसकर मोच पर बांधें। इससे मोच में लाभ होता है।
घाव के इलाज की आयुर्वेदिक दवा है तून: तूनी की छाल का चूर्ण बना लें। इसे घाव पर छिड़कने से घाव जल्दी भर जाता है। तूनी की छाल को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है।
फोड़े-फुन्सी होने पर भी तूनी के फायदे ले सकते हैंं। तूनी की छाल को घिस लें। इसे फोड़े-फुन्सी वाले अंग पर लगाएँ। इससे फोड़े-फुन्सी में लाभ होता है।
टाइफाइड बुखार के साथ जब दस्त होने लगता है, तब तून की छाल का काढ़ा पीना चाहिए। आपको काढ़ा को 10-20 मिली मात्रा में पीना है। इससे लाभ होता है।
तूनी की छाल का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पिएं। इससे पुराना बुखार भी ठीक हो जाता है।
तूनी की छाल के साथ लताकरंज के बीजों को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे 10-20 मिली मात्रा में पीने से टाइफाइड और पुराने बुखार में लाभ होता है।
तुन या तूणी (Indian Mahogany) एक बहुपयोगी काष्ठ और औषधीय पादप है। Toona ciliata M Roem or Indian Mahogany or Red Cedar has industrial and medicinal use

मासिक धर्म विकार में भी तूनी का औषधीय गुण लाभ पहुंचाता है। तूनी के फूल या छाल का काढ़ा बनाकर पिएं। इससे मासिक धर्म विकारों में लाभ होता है। इसे 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से मासिक धर्म चक्र संबंधी विकारों में फायदा होता है।
अंडकोष विकार (Testicle Disorder) में तूनी के इस्तेमाल से बहुत फायदे होते हैं। तूनी पत्ते के रस में बराबर मात्रा में तुलसी की पत्तियों का रस और घी मिलाकर पका लें। ठंडा होने पर अण्डकोष पर लेप करें। इससे लाभ होता है।
तूनी के फायदे से पेचिश का इलाज कर सकते हैं।  इसके लिए तूनी की छाल का काढ़ा बना लें। इसका सेवन करें। आपको 10-15 मिली मात्रा में सेवन करना है। इससे पेचिश में फायदा होता है।

तून के उपयोगी भाग:
छाल, फूल, पत्ते, बीज, गोंद हैं।
लेकिन किसी बीमारी के लिए तून का सेवन करने या तून का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

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