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घ्यूं त्यार - कुमाऊँनी व्यंग्य

आज घ्यू त्यार छ, आज जो घ्यू नि खाल उ अघिल जनम में गनेलकि जाति जां Kumaoni Satire Gyun Tyar or Ghrut Sankarnti

घ्यूं त्यार

(लेखक: विनोद पन्त 'खन्तोली')

त्यार बारक दिन भै, पुर मुहल्ल पडौस बटी चोंचेन भुबैन आई भै।  कति बटी लगडनैकि तो कति बटी हल्लू पुरि कि खुशबू उण लागि भै।  कति मांसाक बाड और बेडू पूरि कि महक फैलणै।  मी ले हरि का क चौंतार बटी दहल पकड क खेल अतपुर छोडिबेर घर उज्याणि गेयू।  मनै मन पकवान क ध्यान करण में खाप बटी राव टपकण बैठ गे।  खापैकि राव कुर्ताक बोंवैलि पोछि बेर आपुण आंगण में पुज्यूं।  सैर हई भै महाराज, पकवानैकि चौंचेनि भुबैनि तो छोडो साग जवणकि बास ले नि आई भै।

च्याल छैं पुछ तेरि ईज कां छ, च्योल मोबाईल में परचेत हई भोय।  वीक टिक टौक क बीडियो चलि भाय... हा हा हा हा .. खी खी खी खी खु खु खु करण लागि गोय।  मी चाइयै रै गोयूं, मेके अन्ताजे नि आय कि मेके देख बेर हंसणौछे ... पगलि गोछै .. या के छल-छिद्र तो नै लागि गोय ..?
मैलि दुबार पुछ - कि भो रे ...
वीलि कान बटी लीड निकालि बेर कौय - हां पापा क्या हुवा ...

मैलि कौय - बरमान हुवा तेरा .. तसिके पगालनैकि चारि किलै हंसणौछै ...
च्योल कूण लाग ... अरे पापा .. आपके समझ नही आएगा।  ये टिक-टौक है .... ब्रो, कैबेर वीलि आपुण हाथाक द्वि आंगू भ्यैर कै निकाल बाकि आंगूं भीतरकै मोडि भाय।  मेरि तरफ करबेर हाथ छटकूण बैठ गे।

मैलि कोय - कि भो च्याला हाथ में, तसिके डुन हाथ क ईशार किलै करनौछै? कति हाथ द्वारा क्वाडन च्यापिणौ कि ... जरा भिक्स लगै ल्हिनै या लिसकातर लगै ल्हि।  भोव तक ठीक है जाल।
च्योल कूण लाग - पापा ... ये तुम्हारे कोर्स से बाहर की बात है, खैर .. बोलो क्या कह रहे थे!

मैलि कोय - कि कूं च्याला ... त्वीलि मेकें के कूंण लैक कां छोडि राखौ।  अगर त्यार तौ मोबाइल क तार जनन कैं त्वीलि कान भीतर टांजि राखौ तनार भीतर तक मेरि आवाज पुजणै तो यो बता तेरि ईज कां छ?
च्योल कूण लाग - रुको कांल करके पूछता हूं ...
च्यालैलि फोन कर और मेछें कूण लाग ... पापा ... आप भी, अन्दर वाले कमरे में तो है मम्मी।  आप भी देख लिया करो ...

मैलि कौय - तदुका उपर त्वीलि फोन कर ... धात जै लगूनै धें और तेरि ईज भीतर छ,  तू यां चाख में छै .. त्वेकैं भीतर पनै होशै नहांति।
च्योल कूंण लाग - पापा अगर आपका हो गया तो मैं अपना काम करूं ...??

मैलि कौय - होय च्याला कर .. तौ जरूरी काम भै ... तौ मोबाइलै लि होल अघिल कै कारबार।
खैर मी भीतर गेयूं .. स्यैणि बिस्तर में चकव हैबेर पडि भै ..
मैलि कौ .. किलै सिति रैछी, त्यार नै पकाये, जरा जल्दी कर, भूक लागि रै।
स्यैणि कूण लागि... जां दहल पकड खेलण लागि रौछिया उनारनै घर जाना, घर क्यै आछा!

मैलि कौ .. त्यार बार क दिन मूड खराब नि कर, फटाफट खांण बणा ... नतर ...
स्यैणि - नतर .. के ..

मैलि कोय .. नतर के नै यार .. तू खांण ला ..
पांच सात मिनट में स्यैणिलि म्यार अघिल बटी थाई धरि दि ..
थाई में चाय तो.. कां पकवान कां लगड, वी रोज क चारि रवाट, आलू क थेच्चू और एक कोस खुश्याणि धरि भै।

मैलि पुछ यो कि छ ...
स्यैणि कूंण लागि .. म्यार ख्वारपीड हैरे, तसै पकूणकि ताकत छ।  खांछा खाओ, नतर ढकि बेर सिन्दूकाक ताव धरि दिओ।  भोव रत्तै तुमार लिजी तकैणि ततै द्यूल..
आब कि कूछ्यू ... मैलि कोय, आज घ्यू त्यार छ .. कम से कम रवाट चुपडि दिनी।  ला जरा एक कटौर में घ्यू दि दे, आज जो घ्यू नि खाल उ अघिल जनम में गनेलकि जाति जां बल ..
स्यैणि हंसण बैठ गे, कूण लागि .. यो जनम में कौन सा कम छा।  तुम तो यो जनम में ले गनेलै छा ..

मेर पुरषत्व जरा जोर में ऐगे मैलि कौय - जरा तमीजलि बात कर, मी त्वेकैं गनेल जस लागूं...?
स्यैणि कूंण लागि, दोफरि जांणे हडी रूंछा .. दिन भर के काम नै काज।  अवारा रनकारनाक दगाड ताश में मुनि टोटिल कर राखछा।  गनेल है कम ज कि छा ..

मैलि कौय, फिर ले त्योर बैग भयूं ...
स्यैणि कूण लागि ... चुपचाप खांण खाओ, बैग छा, तो बैग बणबेर रओ।  नतरि बैग क झोल बणै बेर, कील में टांकि दयूल।

आब के करछी महराज, चुपचाप खांण खैबेर बिस्तर में टोपि गेयूं।
मेके आपु कें देखबेर गनेल पर एक पहाडि आँण यात उण लाग -
हाडै हडकुलि मांस क सींग .
लागि गे ठपुक ऐगे नींन ....
( आब मेकें ले नींन उण लागि गे)
आज घ्यू त्यार छ, आज जो घ्यू नि खाल उ अघिल जनम में गनेलकि जाति जां Kumaoni Satire Gyun Tyar or Ghrut Sankarnti

(विनोद पन्त 'खन्तोली')

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