
आलू (Potato)
लेखक: शम्भू नौटियाल
आलू वानस्पतिक नाम सोलेनम ट्यूबरोसम (Solanum tuberosum L.) Syn-Solanum andigenum Juz. & Buk., Solanum subandigena Hawkes यह पादप कुल सोलेनेसी (Solanaceae) से संबंधित है। आलू को संस्कृत में स्वादुकन्द, म्लेच्छकन्द, सुकन्दक कहते हैं। आलू एक ऐसा सब्जी है जो सस्ता भी है और पौष्टिक गुणों से भरपूर भी होता है। स्पेन, पुर्तगाल तथा यूरोप में 16 वीं सदी में भारत में 17 वीं सदी में तथा अन्य देशों में 19 वीं सदी में आलू का प्रवेश पुर्तगालियों तथा अंग्रेजों द्वारा हुआ। आलू भारत की सबसे महत्वफपूर्ण फसल है। तमिलनाडु एवं केरल को छोडकर आलू सारे देश में उगाया जाता है। भारत में विशेषतकर उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, मेघालय, बिहार, जम्मू-कश्मीर, पं. बंगाल, महाराष्ट्र व गुजरात में इसकी खेती की जाती है।
आलू सबसे आम और महत्वपूर्ण भोजन स्रोतों में एक है। आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है। भारत के हर रसोईघर में आलू के बिना कोई भी व्यंजन बनाना मुश्किल होता है। इसकी मसालेदार तरकारी, पकौड़ी, चॉट, पापड चिप्स जैसे स्वादिष्ट पकवानो के अलावा अंकल चिप्स, भुजिया और कुरकुरे भी हर जवां के मन को भाते हैं। उत्तराखंड में आलू का थेच्वाणीं सबसे सस्ती व पौष्टिक व्यंजन है। प्रोटीन, स्टार्च, विटामिन सी और के अलावा आलू में अमीनो अम्ल जैसे ट्रिप्टोफेन, ल्यूसीन, आइसोल्यूसीन आदि काफी मात्रा में पाये जाते है जो शरीर के विकास के लिए आवश्यक है।

आलू मीठा और गर्म तासीर का होता है। यह खाने में रुची बढ़ाने के साथ-साथ सूजन कम करने में मददगार होता है। इससे प्राप्त सोलैनिन (Solanine) वेदना कम करने वाला तथा तंत्रिका शूलरोधी (Anti-neuralgic) यानि नर्व के दर्द से राहत दिलाता है। 50-200 मिग्रा की मात्रा में सोलैनीन का प्रयोग करने से कण्डू यानि चर्म रोग कम होता है। आलू पचाने में भारी तथा मल को गाढ़ा करने वाला होता है। लेकिन इसको ज्यादा खाने से शरीर में आलस्य पैदा होता है।
पहाड़ी आलू की भी अपनी पहचान है। इसमें शूगर कंटेंट भी कम होता है और स्वाद में भी बेहतर होता है। ऐसे में इसकी मांग अपेक्षाकृत ज्यादा रहती है। पहाड़ी आलू की अच्छी मांग रही है, तो क्या रोजगार के लिए पहाड़ों पर बड़े पैमाने पर पेटैटो फार्मिग नहीं हो सकती? व्यापारिक फसलों में आलू पहाड़ों की प्रमुख फसल है। पहाड़ी आलू की साख आज भी मैदानों में बनी हुई है। कहा जाता है। उत्तराखण्ड के पहाड़ों में 1843 के आस-पास पहली बार आलू लाया गया था। यहाँ आलू लाने का श्रेय एक अंग्रेज अफसर मेजर यंग को दिया जाता है। जिसने आलू के लिये अच्छी आबोहवा देखकर पहली बार मसूरी की पहाड़ियों में इसे बोया था। आलू वहाँ खूब पनपा और इसकी खेती लोकप्रिय होती चली गई।

कभी गरुड़ घाटी के आलू का बड़ा नाम था और मंडी में इसे पहाड़ी आलू का मानक माना जाता था। पहाड़ी आलू की खूबी के बारे में अखर बात करें तो एक खास बात यह है कि पहाड़ी आलू उस समय बाजार में उतरता है जब देश के अन्य क्षेत्रों में आलू की ताजा फसल नहीं होती। ऐसे में पहाड़ी आलू की महत्ता और बढ़ जाती है। बाजार में यह आलू अपेक्षाकृत महंगा होता है। इसका सीधा मतलब है कि पहाड़ी आलू लगाने वाले किसानों को दाम भी अच्छे मिलते हैं। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में पोटैटो फार्म बनाकर युवाओं को रोजगार के लिए आकर्षित किया जा सकता है। सरकार को इस तरह के फार्म बनाने के लिए ग्रामीण युवाओं को आसान ऋण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

आलू के फायदे:
*आलू में मौजूद कार्बोहाइड्रेट हमारा पाचनतंत्र दुरुस्त रखने में काफी मददगार होता है। और हमारा खाना अच्छे से पचता है।
*उबले आलू शरीर के अंदर की सूजन को खत्म करते हैं। आलू में मौजूद विटामिन सी, पोटेशियम, विटामिन-बी6 और अन्य खनिज, आंतों और पाचन तंत्र में हुई सूजन को घटाते हैं।
*आलू के भुने हुए कंद या गांठ का सेवन करने से मुखपाक या मुँह के छाले कम होते हैं।
*बहुत ठंड लग जाने पर या सर्दी होने पर साइनसाइटिस का दर्द होने लगता है। साइनसाइटिस में आलू गुणकारी होता है। 2 से 5 मिली आलू के पत्ते के रस में मधु तथा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से गले की जलन (कण्ठदाह) और साइनसाइटिस से आराम मिलता है।
*खाँसी से राहत पाने के लिए 2 से 5 मिली आलू के पत्तों के रस का सेवन करने से पुरानी खाँसी ठीक होती है।
*आलू के कंद को भूनकर खाने से कम मूत्र होने की परेशानी होती है कम।
*भुने हुए आलू के कंद का सेवन करने से ब्रेस्टमिल्क की मात्रा बढ़ती है।
*आलू के कंद को पीसकर आग से जले हुए स्थान पर लेप करने से घाव तथा सूजन को कम करने में मदद मिलती है।
*कभी-कभी किसी चीज के एलर्जी के कारण दाद-खाज खुजली की समस्या हो जाती है। कच्चे आलू को काटकर दाद तथा खाज वाले स्थानों पर मलने से लाभ होता है।
*कच्चे आलू को पीसकर चेहरे पर लगाने से स्किन में ग्लो आता है और दाग धब्बा कम होता है।
*आलू को भूनकर हलवा बनाकर सेवन करने से यह पौष्टिक तथा बलदायक फल प्रदान करता है। और आलू को भूनकर अदरख तथा पुदीना डालकर जूस बनाकर पीने से भूख बढ़ता है और कमजोरी दूर होती है।
*आलू में कार्बोहाइड्रेट होता है, जिससे आपके वजन में इजाफा हो सकता है। लिहाजा यह उन लोगों के लिए खाना का अच्छा विकल्प हो सकता है जो अपना वजन बढ़ाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।
*आलू में मैग्नीशियम होता है, जो आपके रक्तचाप को कंट्रोल करता है। इसलिए आपको उबले आलू जरूर खाने चाहिए।
*आलू में मौजूद विटामिन, कैल्शियम और मैग्नीशियम गठिया रोगियों के लिए फायदेमंद हैं।
आलू के अधिक खाने से नुकसान:
हरे आलू के फल तथा हरे छिलके वाले कंद में कभी-कभी विषाक्त प्रभाव भी देखने को मिलता है, अत: उसके भीतर के अंश का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए। ज्यादा आलू खाना शरीर के लिए नुकसानदायक साबित होता है। आलू से वजन बढ़ता है। अगर शरीर के वजन को कम करना है तो आलू से परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही शुगर के रोगियों को भी आलू खाने से दूरी बनाए रखनी चाहिए। वहीं अधिकतर लोग आलू को डीप फ्राई करके खाते है लेकिन ये सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता है।
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