
माँस (उड़द ) की दाल का चैंस
पहाड़ो में दालों में माँस या उड़द की दाल का स्वाद विशेष रूप से पसंद की जाती है। सर्दियों में माँस की दाल के विभिन्न व्यंजन बनाने व खाने का प्रचलन पहाड़ों में विशेष रूप से है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी माँस की दाल उत्तम मानी जाती है क्योंकि इसमें प्रोटीन मात्रा पायी जाती है। जिस कारण इसे अन्य दालों से अधिक बलवर्द्धक, शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने वाला और शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करनेवाला माना जाता है। पहाड़ में तीज त्योहारों के अवसर पर माँस या उड़द की साबुत और मिक्स दाल या उड़द की दाल की कचौरियाँ, बड़े और बढ़ियाँ तो घरों में बनाने और प्रयोग करने का प्रचलन है। पर छिलके सहित साबुत उड़द दाल से तैयार कुमाऊँ में चैंस और गढ़वाल में चैंसू के नाम से जाने जाने वाले पहाड़ी व्यंजन का एक विशेष महत्व रखती है।
चैंस के पौष्टिक और स्वादिष्ट स्वाद का मज़ा सर्दियों के मौसम में विशेष रूप लिया जाता है। यह हमारे शरीर को ऊर्जा तो देती ही है साथ ही इसमें प्रयुक्त किये जाने वाले पहाड़ी मसाले अपने औषधीय गुणों के कारण स्वास्थ्य लिए भी उपयोगी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार उड़द की दाल में प्रोटीन और स्टार्च के साथ ही प्रचुर मात्रा में लौह तत्व, कैल्शियम, विटामिन बी और थायमीन आदि होता है। कहा जाता है कि इसमें मछलियों से ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है जो कोलेस्ट्राल को बढ़ने से रोकता है। यह शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने और हड्डियों की कोशिकाओं व मांसपेशियों के विकास में भी सहायक होता है। उड़द में पाया जाने वाला मैग्नीशियम मानव शरीर की धमनियों में रुकावट को रोकता है और दिल को स्वस्थ और क्रियाशील बनाए रखता है।
चैंस बनाने की विधि (Recipe of Kumaoni Urad Daal Chains):
अच्छे परिणाम के लिए साबुत उड़द के दानों को लोहे की कढ़ाही में हल्का भून लें। भूनते समय जैसे ही बाहरी छिलका गर्म होकर फटने लगे तो आंच तुरंत बंद कर दें और दाल को चलाते रहे। फिर दाल के थोड़ा ठंडा होने पर उसे सिल-बट्टे पर हल्का दल दें। आजकल सिल-बट्टे के स्थान पर मिक्सी प्रयोग की जाने लगी है तो इसे मिक्सी में भी ग्राइंड कर कर सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रहे की दाल के दाने ४-५ टुकड़ो में टूट जाएँ और ज्यादा महीन न करें। इस दाल को एक बर्तन में रख लें।
अब कढ़ाई में सरसों का तेल डालकर उसे आंच पर गर्म होने के लिए रख दें। अब गर्म तेल में साबुत जीरा, आजवाइन और लहसुन की कुछ कलियां और अगर उपलब्ध हो तो जखिया के दाने डाल दें। जब या चटकने लगे तो अपनी पसंद से महीन कटा प्याज भी दाल सकते हैं। प्याज के हल्का भूरा होने पर हल्दी, धनिया पाउडर का पेस्ट बनाकर भूनें। चाहें तो इसी बीच कतरा हुआ अदरक, करीपत्ता, काली मिर्च के साबूत या कटे दाने, बड़ी इलायची और अंत में थोड़ा गर्म मसाला भी मिला दें।
अगर पारम्परिक तरीके से बनाने की बात करें तो अन्य पहाड़ी व्यंजनों की तरह इसमें भी मसालों में सिलबट्टे में पीसे हुए हल्दी, मिर्च, धनिया और जखिया व लहसुन की कलियाँ तड़के में प्रयोग की जाती हैं। यह दाल सामान्य उड़द की दाल की तरह गाढ़ी लेसदार नहीं होती है क्योंकि भून लेने के कारण पकाने से यह थोड़ा काम गलती है। इस दाल को थोड़ा गाढ़ा करने के लिए इसमें चाहें तो चोकरयुक्त आटे या चावल के आटे की थोड़ी सी मात्रा मिला मसालों के साथ मिक्स कर भून लें। आटा हल्का भुन जाने के बाद इसमें गर्म पानी डालकर पकने छोड़ दें। इसे आधे से पौने घंटे तक हलकी सामान्य आंच पर पकाएं, बीच में इसे हिलाते रहे ताकि आटा तली में ना लगे।
अब चैंस सर्व करने को तैयार हो गयी है, जिसे ऊपर से धनिया की पत्तियां मिलाकर सजा सकते हैं। इसे सामान्यत: चावल के साथ परोसा जाता है, चाहें तो रोटी के साथ भी खा सकते हैं।
चैंस बनाने का एक बहुत ही आसान तरीका शैफ भुप्पी ने अपने यूट्यूब वीडियो में भी दिया है, जिसे लिंक के रूप में हमने आपके लिए ऊपर दिया है, वहाँ से भी वीडियो के माध्यम से आप सीख सकते हैं।
0 टिप्पणियाँ