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बुरांश (Rhodo-dendron)


बुरांश (Rhodo-dendron)
लेखक: शम्भू नौटियाल

बुरांश को अंग्रेजी में 'रोडोडेन्ड्रोन' कहते हैं जो कि मूलतः ग्रीक भाषा का शब्द है। 'रोडो' अर्थात गुलाब और 'डेन्ड्रोन' अर्थात वृक्ष। यह ऐरिकेसी वर्ग का पौधा है जिसका वानस्पतिक नाम रोडोडेंड्रोन अरबोरियम (Rhodo-dendron arboreum) है। यह उत्तरांखड का राज्य वृक्ष है तथा नेपाल का राष्ट्रीय पुष्प है। वैसे तो उत्तराखंड में यह मार्च में खिलना शुरू होता है। लेकिन आजकल ही यह खिलना शुरू हो गया है। बुरांश उत्तराखंड के जनमानस में गहराई से समाया हुआ है। पांच हजार फीट की ऊंचाई से जीवन शुरू करने वाले बुरांश की उत्तराखंड में पांच प्रजातियां पाई जाती हैं।

बुरांश सिर्फ लाल रंग का ही नहीं बल्कि इसका फूल सफेद, गुलाबी, पीला और नीला भी होता है। लगभग 15 से 20 दिन में फूलों के खिलने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इसकी पत्तियां मोटी और फूल घंटी के आकार के लाल होते हैं। अधिकतर बुरांश के फूल रक्तिम वर्ण लिए सुंदर व मनमोहक होते हैं। इसके अलावा गुलाबी, सफेद, नीला व पीले फूल भी होते हैं। लेकिन, किसी भी फूल में सुगंध नहीं होती। इनमें सबसे प्रचलित प्रजाति है रोडोडैंड्रोन आरबोरियम। यह प्रजाति पांच से आठ हजार फीट की ऊंचाई पर पाई जाती है। इसका फूल सुर्ख लाल होता है। इसके वृक्ष काफी बड़े-बड़े होते हैं। दूसरी प्रजाति है रोडोडैंड्रोन बारबेरम। इसके वृक्ष आठ से दस हजार फीट की ऊंचाई पर पाए जाते हैं। इसके पुष्प गुलाबी होते हैं। इस प्रजाति की विशेषता यह है कि इसके वृक्ष का तना भी गुलाबी होता है।



उत्तराखंड में पाई जाने वाली बुरांश की तीसरी प्रजाति है रोडोडेंड्रोन कंपैनुलेडम। यह दस से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर पाई जाती है। इसे टिंबर लाइन भी कहा जाता है। यह टिंबर लाइन और अल्पाइन (बुग्याल) के बीच सेतु का काम भी करती है। इसका वृक्ष नहीं होता, बल्कि यह प्रजाति झाड़ी के रूप में होती है। इसके फूल हल्के सफेद और नीले होते हैं। इसके बाद चौथी प्रजाति रोडोडेंड्रोन एन्थोपोगोन। यह 11 से 16 हजार फीट की ऊंचाई पर पाई जाती है। इसके पौधे एक से दो फीट ऊंचे होते हैं। इसके फूल का रंग हल्का गुलाबी होता है। बुरांश की पांचवीं प्रजाति रोडोडैंड्रोन लैपीडोटम है। यह भी 11 से 16 हजार फीट ऊंचाई पर पाई जाती है। इसके फूल हल्के सफेद और पीला रंग लिए हुए होते हैं।


बुरांश का उपयोग जूस के अलावा अचार, जैम, जैली, चटनी तथा आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक दवाइयों में भी किया जाता है। बुरांश के विभिन्न औषधीय गुणो के कारण आयुर्वेदिक पद्धति की एक प्रसिद्ध दवा ‘अशोकारिष्ट’ में भी रोडोडेंड्रोन आरबोरियम प्रयोग किया जाता है। अच्छी एंटीऑक्सीडेंट एक्टिविटी के साथ-साथ बुरांश में अच्छी एंटी डाइबिटिक, एंटी डायरिल तथा हिपेटोप्रोटिक्टिव एक्टिविटी होती है। बुरांश को हीमोग्लोबिन बढ़ाने, भूख बढ़ाने, आयरन की कमी दूर करने तथा हृदय रोगों में भी प्रयोग किया जाता है।

मेडिकल साइंस में भी यह साबित हो चुकी है कि बुरांस के फूलों में मीथेनॉल होता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। बुरांस शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को कंट्रोल करता है। साथ ही हाइपरटेंशन और डायरिया में भी आराम पहुंचाता है। बुरांस में विटामिन ए, बी-1, बी-2, सी, ई व के मौजूद होने के कारण यह शरीर का वजन नहीं बढ़ने देता और कोलेस्ट्रॉल से भी बचाता है। Quercetin और rutin दो ऐसे पिंगमेंट हैं जो बुरांस में पाए जाते हैं और यह आकस्‍मिक ‌हार्टअटैक के खतरे को बिल्कुल कम कर देता है। लीवर के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है।



लेकिन अपने मन से बुरांस का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करें अर्थात औषधि के रूप में बुरांश के जूस या अन्य किसी तरह से बुरांश का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की सलाह भी जरूर लें। उपयोग की बात करें तो तो बुरांश का फूल बहुत ही उपयोगी है, क्योंकि जूस के अलावा यह औषधि के रूप में भी प्रयोग होता है और इसमें शहद की मात्रा सर्वाधिक होती है। बुरांश को लेकर विशेष कार्य योजना तैयार कर इसको आर्थिकी से जोड़ने के बहुत से प्रयास चल रहे हैं।
 

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