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सरसों, राई या लाही (Mustard)


सरसों, राई या लाही

लेखक: शम्भू नौटियाल

सरसों (वानस्पतिक नाम : Brassica campestris) यह क्रुसीफेरी या ब्रेसीकेसी कुल का पादप है। तिलहनी फसल में सरसों का अहम स्थान है। लागत कम और फायदा अधिक होने से किसानों के लिए सरसों पीला सोना है। प्राचीन समय में सरसों का मसालों के रूप में अत्यधिक महत्व देखा गया है। सामान्यतः सरसों की उत्पत्ति Asia minor जैसे ईरान क्षेत्र तथा मध्य एशिया से हुई है। इसके अतिरिक्त इसकी उत्पत्ति हिमालयी क्षेत्र तथा भू-मध्य सागरीय क्षेत्र से ही हुई है। अत: सरसों की उत्पत्ति उपरोक्त तीन क्षेत्रों से मानी जाती है। सरसों की फसल प्रमुख रबी की फसल है, सरसों सामान्यत: असिंचित भूमि में उगाई जाती है, परन्तु कुछ स्थानों पर सरसों की खेती सिंचित क्षेत्र में ही की जाती है।/p>

पादप की प्रकृति:

(i) सरसों का पादप मुख्यतः एक वर्षीय , लम्बा , दुर्बल और अल्पशाखित होता है।
(ii) सरसों की मूल मूसला मूल प्रकार की होती है।
(iii) सरसों का तना सामान्यत: हरा, अरोमिल , शाखित , दुर्बल तथा लम्बा होता है, तने की लम्बाई प्रमुखत: 3 से 5 फुट होती है।
(iv) सरसों की पत्तियां आकार में बड़ी सरल , रोमिल , विणाकार तथा तीव्र गंध युक्त होती है। तीव्र गंध सल्फर युक्त यौगिको की उपस्थिति के कारण होती है।
(v) सरसों का पुष्पक्रम प्रारूपिक असीमाक्ष होता है।(सरसों के पुष्प एकान्तर क्रम में तथा संवृन्ति पाए जाते है।)
(vi) सरसों में पुष्पों की संख्या अत्यधिक होती है तथा पुष्प पीले रंग के चमकदार होते है।
(vii) सरसों का पुष्प चर्तुतयी होता है।
(viii)सरसो में सिलिकुआ प्रकार का फल पाया जाता है।
(ix) सरसों का बिज सामान्यत: हलके पीले रंग का अभ्रुणपोषी तथा तेल युक्त होता है।
(x) सामान्य परिस्थितियों में प्रति हेक्टेयर 10-12 क्विंटल सरसों उत्पन्न होती है।
(xi) सरसों के बिज में 30-48% तेल पाया जाता है जिसका निष्कर्षण परंपरागत घानियो के द्वारा या तेल की मिलो के द्वारा किया जाता है।
(xii) सरसों का तेल सामान्यतया भारी तथा सुनहरे पीले रंग का पाया जाता है।
(xiv) सरसों का तेल सामान्यत: तीव्र गंध युक्त होता है जो सल्फर युक्त यौगिक की उपस्थिति के कारण होता है।

सरसों के तेल में पाया जाने वाला प्रमुख यौगिक allyl iso thio cynate कहलाता है।
(xv) सरसों के तेल में सामान्यतया इरुसिक वसीय अम्ल पाया जाता है। सरसों के तेल में उपस्थित अन्य वसीय अम्ल ओलिक अम्ल तथा palmatic अम्ल कहलाते है।

सरसों की उन्नत किस्में:

वरुणा टाइप-59, क्रांति, रोहिणी, ऊषा गोल्ड हैं। ऊसर में एनडीआर-850 बोने से उत्पादन बंपर होता है। आरएच-749, 406, आइजे-31 उन्नत किस्में हैं। पछेती बोवाई के लिए वरदान किस्म है। इसकी बोवाई 15 नवंबर तक कर सकते हैं।




सरसों का महत्व

(i) सामान्यतया सरसो के बीजो से प्राप्त तेल खाद्य तेल के रूप में उपयोग किया जाता है।
(ii) सरसों का तेल मालिश हेतु, दीपक जलाने के लिए तथा केश तेल के रूप में उपयोग किया जाता है।
(iii) सरसो का तेल प्राप्त करने के पश्चात् बचे हुए अवशेष खल के रूप में पशुओं हेतु पोषक पदार्थ के रूप में उपयोग किये जाते है।
(iv) साबुन तथा रबर सम्बन्धित उद्योगों में सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है।
इन उद्योगों में इस तेल को प्रमुखत: :- प्रतिस्थापक के रूप में उपयोग किया जाता है।
(v) विभिन्न प्रकार की मशीनों में सरसों का तेल स्नेहक के रूप में उपयोग किया जाता है।
(vi) सरसों के बीजो को सामान्यत: मसालों तथा अचार के निर्माण हेतु भी उपयोग किया जाता है।
(vii) सरसों का तेल चमड़े उद्योग में चमड़े को मुलायम करने हेतु उपयोग किया जाता है।

कड़वे तेल के नाम से पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाने वाला सरसों का तेल अपनी तासीर और गुणों के कारण कई तरह की समस्याओं में औषधि‍ के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

सरसों के तेल के 10 फायदे -

* सरसों के तेल को बहुत पौष्टिक माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए भी किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होने से सर्दियों में यह अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
* सरसों के तेल की मालिश करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्त संचार भी बेहतर होता है। यह शरीर में गर्माहट पैदा करने में भी मददगार होता है।
* दांतों की तकलीफ में सरसों के तेल में नमक मिलाकर रगड़ने से फायदा होता है, साथ ही दांत पहले से अधिक मजबूत हो जाते हैं।
* त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बेहद फायदेमंद होता है। यह शरीर के किसी भी भाग में फंगस को बढ़ने से रोकता है और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।
* यह बालों की जड़ों को पोषण देकर रक्तसंचार बढ़ाता है जिससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है। इसमें ओलिक एसिड और लीनोलिक एसिड पाया जाता है, जो बालों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए अच्छे होते हैं।
* सरसों तेल को कई लोग एक टॉनिक के रूप में भी प्रयोग करते हैं। यह शरीर की कार्य क्षमता बढ़ा कर शरीर की कमजोरी को दूर करने में सहायता करता है।इस तेल की मालिश के बाद स्नान करने से शरीर और त्वचा दोनों स्वस्थ रहते हैं।
* ठंड के दिनों में सरसों का तेल गर्माहट के लिए रामबाण इलाज है, हल्के गर्म तेल की मसाज से रूखी-सूखी त्वचा भी नर्म, मुलायम व चिकनी हो जाती है। सरसों के तेल की मालिश से गठिया रोग और जोड़ो का दर्द भी ठीक हो जाता है।
* इसमें विटामिन ई भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो त्वचा को अल्‍ट्रावाइलेट किरणों और पल्‍यूशन से बचाता है। साथ ही यह झाइयों और झुर्रियों से भी काफी हद तक राहत दिलाने में मदद करता है।
* भूख नहीं लगने पर भी सरसों का तेल आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। अगर भूख न लगे, तो खाना बनाने में सरसों के तेल का उपयोग करना लाभप्रद होता है। शरीर में पाचन तंत्र को दुरूस्त करने में भी लाभदायक होता है।
* सरसों के तेल का प्रयोग करने से से कोरोनरी हार्ट डिसीज का खतरा भी कम होता है। इसलिए सरसों के तेल को अपने खाने में जरुर शामिल करें।

सर्दियों में सरसों के साग का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है:-

इसमें मौजूद विटामिन्स, मिनिरल्स, फाइबर और प्रोटीन इसे बेहद फायदेमंद बनाते हैं।
सरसों के 100 ग्राम साग में 27 कैलोरी, केवल 0.4 ग्राम फैट्स, 358 मिली ग्राम पोटैशियम, 4.7 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 3.2 ग्राम फाइबर, 1.3 ग्राम शुगर, विटामिन ए, सी, डी, बी 12, मैग्नीशियम, आयरन और कैल्शियम जैसे तत्व भरपूर मात्रा में देता है।

सरसों के साग में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो न केवल शरीर को डीटॉक्सिफाई करते हैं बल्कि शरीर की प्रतिरोधी क्षमता भी बढ़ाते हैं। इसके सेवन से ब्लैडर, पेट, ब्रेस्ट, फेफड़े, प्रोस्टेट और ओवरी के कैंसर से बचाव में मदद मिलती है।

दिल के लिए फायदेमंद
सरसों के साग के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटता है और फोलेट का निर्माण अधिक होता है। इससे कार्डियोवास्कुलर रोगों की आशंका घटती है।

मेटाबॉलिज्म ठीक रखता है
सरसों के साग में फाइबर अच्छी मात्रा में है जो शरीर की मेटाबॉलिक क्रियाओं को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसके सेवन से पाचन भी अच्छी तरह होता है।

सरसों के साग में कैलोरी कम होती है और फाइबर अधिक होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और वजन को नियंत्रित रखना आसान हो जाता है।

हड्डियों को मजबूती
सरसों के साग में कैल्शियम और पोटैशियम अच्छी मात्रा में होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। यह हड्डियों से जुड़े रोगों के उपचार में भी फायदेमंद माना जाता है।

आंखों की रोशनी
सरसों के साग में विटामिन ए अच्छी मात्रा में होता है जो आंखों की मासंपेशियों को किसी भी तरह की क्षति से बचाता है और आंखों की रोशनी बढ़ाता है।

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